मैनपुरी। जिले की स्वास्थ्य सेवाएं पूरी तरह से चरमरा गई हैं। अस्पताल में जीवन रक्षक दवाइयों के साथ ही पेरासिटामोल टेबलेट तक नहीं मिल रहा है। बिना दवाइयों के अस्पताल में मरीजों की मौत हो रही हैं। अस्पताल में भर्ती दो और मरीजों ने दम तोड़ दिया।
स्वास्थ्य सेवाएं हरदिन बिगड़ती ही जा रही हैं। सबसे अधिक दिक्कत तो जिला अस्पताल में आ रही हैं। यहां आने वाले मरीजों को प्राथमिक उपचार तक नहीं मिल पा रहा है। दवाइयों की भारी कमी के कारण अस्पताल की व्यवस्थाएं फेल हो रही हैं। दवाइयों की कमी के बीच लगतार मरीजों की मौत हो रही है। हर रोज औसतन एक से दो मरीज की जिला अस्पताल में मौत हो रही है।
जिला अस्पताल में जीवन रक्षक दवाइयों की तो बात छोड़ो, बुखार उतारने के लिए जरूरी पेरासिटामोल टेबलेट तक नहीं है। चार दिन पहले थाना बिछवां क्षेत्र के गांव जसरऊ निवासी इतवारी लाल के 55 वर्षीय पुत्र भारत सिंह को परिजनों ने बुखार में गंभीर हालत के चलते जिला अस्पताल में भर्ती कराया था। यहां सोमवार को उसकी मौत हो गई।
औंछा थाना क्षेत्र के गांव संतपुर निवासी रामनरेश की 65 वर्षीय पत्नी वासनादेवी को परिजनों ने बुखार आने पर रविवार को जिला अस्पताल में भर्ती कराया था, उपचार के दौरान सोमवार को उनकी भी मौत हो गई। डॉ. जेजे राम ने बताया कि दोनों ही मरीजों को गंभीर हालत में भर्ती कराया था। परिजनों ने बताया कि उन्हें कुछ दिनों से बुखार आ रहा था। जिले में बुखार के साथ ही मलेरिया के मरीजों की भी संख्या बढने लगी है।
जिले में संक्रामक रोग इस कदर हावी हैं कि हर रोज मारीजों की मौत हो रही है। पिछले सात दिन के रिकार्ड पर यदि नजर डाली जाए, तो नौ मरीजों की मौत हुई है। इसमें से छह मरीजों की अकेले जिला अस्पताल में ही मौत हुई है।