एटा।
गर्मी के कहर ने लोगों के साथ-साथ दुधारू पशुओं को भी प्रभावित किया है। आलम यह है कि गर्मी बढ़ने से जिले में दूध की किल्लत बढ़ती जा रही है। जिले में करीब 40 फीसदी तक दुग्ध उत्पादन में गिरावट दर्ज की गई है। मांग बढ़ने का लाभ उठाने के लिए पशुपालकों ने दूध के दाम बढ़ा दिए हैं। दूध की कीमतें 50 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच गई हैं।
भीषण गर्मी शुरू होते ही पशुओं का दुग्ध उत्पादन काफी कम हो गया है। जिले में कुल मिलाकर 24,0609 दुधारू गाय और भैंस हैं। दो माह पहले तक इन पशुओं से करीब दो लाख लीटर दूध प्रतिदिन प्राप्त हो रहा था, लेकिन अप्रैल से पशुओं के दुग्ध उत्पादन में लगातार कमी आ रही है। वर्तमान में यह उत्पादन करीब एक लाख लीटर प्रतिदिन पर आ गया है। ऐसी स्थिति में दूध की मांग पूरी होना मुश्किल हो रही है।
तमाम पशु पालक इस कमी का फायदा भी उठा रहे हैं। दूध के दाम पिछले चार से पांच रुपये तक बढ़ गए हैं। पहले जहां दूध 40-45 रुपये प्रति लीटर मिल रहा था, वहीं अब यह कीमत 46-50 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच गई है। पशु पालक भोले उपाध्याय और अनुज कुमार का कहना है कि दुग्ध उत्पादन में कमी आई है, जबकि पशु पालन का खर्चा उतना ही है। ऐसे में दूध के दाम बढ़ाना मजबूरी है।
डेयरी पर भी दूध की किल्लत
जिले में पिछली सरकार द्वारा शुरू की गईं कामधेनु डेयरियों में से करीब 44 डेयरियां क्रियाशील हैं। यहां से प्रतिदिन करीब आठ हजार लीटर दूध की आपूर्ति होती है, लेकिन मौसम बदलने के साथ आपूर्ति घटकर पांच हजार लीटर प्रतिदिन रह गई हैं। वहीं सरकार बदलने के बाद करीब डेढ़ दर्जन निष्क्रिय हो गई हैं।
दूध कंपनियों को भी नहीं मिल रहा दूध
शहर में दूध बिक्री के बाद दूध कंपनियों को मिलने वाले दूध में भी कमी आई है। आलम यह है कि जिले के 35 चिलर प्लांटों से करीब दो लाख लीटर दूध की प्रतिदिन आपूर्ति की जाती है। मगर यह आपूर्ति अब घटकर एक लाख 20 हजार लीटर पर आ गई है।
मिलावटी और सिंथेटिक दूध का कारोबार तेज
दूध की कमी को देखते हुए मिलावटखोर बाजारों में सिंथेटिक दूध खपा रहे हैं। करीब आधे रह गए दूध उत्पादन से सामान्य मांग की ही पूर्ति नहीं हो पा रही, जबकि इन दिनों वैवाहिक कार्यक्रमों में दूध और दुग्ध उत्पादों की मांग बढ़ी हुई है।
मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. केएस धाकरे ने बताया कि गर्मी के मौसम में हरे चारे की कमी हो जाती है। इसके अभाव में पशुओं में दुग्ध उत्पादन घट जाता है। वहीं शरीर के तापमान को नियंत्रित रखने में पशुओं की ऊर्जा नष्ट होती है, जिसका असर भी दुग्ध उत्पादन पर पड़ता है।
कहते हैं आंकड़े
809077 कुल गोवंश है जिले में
1,45,801 गाये हैं जिले में
52,975 दुधारू गाय हैं जिले में
6,63,276 भैंस हैं जिले में
1,87,634 भैंस देती हैं दूध
दूध की मांग
05 लाख लीटर है जिले में दूध की मांग
03 लाख लीटर की आपूर्ति भी मुश्किल
50 रुपये लीटर तक बिक रहा है दूध
44 डेयरियां संचालित हैं जिले में
08 हजार लीटर दूध की होती है आपूर्ति
02 हजार दूधिया हैं जिले में