फिरोजाबाद। महिलाएं हर क्षेत्र में कदम से कदम मिलाकर चल रही हैं। जिन कार्यों में पुरुष भी पीछे रह गए, उनमें महिलाओं ने बाजी मारी है। विकास का माडल बनाकर अपने क्षेत्रों को नई पहचान दिलाई। समाज सुधार के कार्यों में भी पीछे नहीं रहीं। महिलाओं ने प्रदेश और देश में जनपद का नाम किया रोशन किया है।
गांव मोढ़ा की पूर्व प्रधान मिथलेश यादव ने विकास माडल के नाम से अपनी पहचान बनाई है। पहली बार प्रधान बनने के बाद पंचायत का विकास कराया। उन्हें भारत सरकार की तरफ से 24 अप्रैल 2015 में पंचायत सशक्तिकरण का पुरस्कार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मौजूदगी में केंद्रीय पंचायत राज मंत्री चौधरी वीरेंद्र सिंह ने दिया था। पंचायत के विकास के लिए आठ लाख रुपये की अतिरिक्त धनराशि पुरस्कार के रूप में प्रदान की गई थी। वहीं, 29 मार्च 2015 को तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने रानी लक्ष्मीबाई पुरस्कार दिया था। यह पुरस्कार भी महिला प्रधान बनकर विकास कार्य को सराहनीय रूप से कराने के लिए दिया गया था।
बच्चे देश का भविष्य कहे जाते हैं। देश के भविष्य को शिक्षित करने पर लक्ष्मी सिकरवार को 22 जनवरी 2016 में राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी ने सम्मानित किया था। लक्ष्मी सिकरवार 2005 से गरीब बच्चों को शिक्षित कर रही हैं। हर साल 50 बच्चों को प्राइवेट स्कूलों में अपने खर्चे से शिक्षाग्रहण कराती हैं। उन्हें पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया था।
एमबीए कर दिल्ली की एक एनजीओ में काम करने वाली नूतन राठौर भाजपा से फिरोजाबाद नगर निगम की महापौर चुनी गई। यूपी की सबसे कम उम्र की मेयर बनने का तगमा उन्हें मिला। नूतन राठौर को सबसे कम उम्र की मेयर चुने जाने पर न केवल यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लखनऊ बुला कर बधाई दी वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी दिल्ली बुला कर बधाई दी। नूतन राठौर कहती हैं सकारात्मक सोच के साथ जो भी काम किया जाए उसमें सफलता जरूर मिलती है। लक्ष्य तय होना चाहिए और सोच सही होनी चाहिए।
फिरोजाबाद में 200 कांच व चूड़ी के कारखाने संचालित हो रहे हैं। चूड़ी के कारखानों में करीब तीन से चार हजार महिलाएं भंगार बीनने का कार्य करती हैं। कड़ाके की सर्दी हो या कड़ी धूप, भट्ठी की तपिश के आगे यह महिलाएं घंटों तक भंगार बीनने में लग रहती हैं। दिनभर कार्य के बदले मिलने वाली मजदूरी से परिवार का पालन पोषण होना भी मुश्किल हो रहा है। कारखाने में कार्य करने वाली ककरऊ कोठी निवासी यासमीन, महावीर नगर निवासी निशा देवकी, मिथलेश ने बताया कि सुबह से शाम तक कार्य करने के बाद मात्र 240 रुपये मिलते हैं। हम लोग कई सालों से 300 रुपये मजदूरी देने की मांग रहे हैं, लेकिन सेवायोजक सुनवाई नहीं करते।
कारखानों से निकलने वाली कच्ची चूड़ियां का शहर के दो दर्जन से अधिक मोहल्लों में जुड़ाई व छंटाई का कार्य होता है, परंतु इन महिला श्रमिकों का ठेकेदारों उत्पीड़न किया जा रहा है। चूड़ी जुड़ाई करने वाली रेखा व सुमन का कहना है कि 100 तोड़ों की जुड़ाई करने पर ठेकेदार द्वारा मात्र 600 रुपये दिए जाते हैं। सौ तोड़ों की जुड़ाई पर एक हजार रुपये की मांग लंबे समय से कर रहे हैं, लेकिन ठेकेदार 600 रुपये में भी कटौती कर भुगतान करते हैं। इसमें भी 50-60 रुपये लीटर मिट्टी का तेल खरीदना पड़ता है। सुबह से देर रात तक आंखों फोड़ने, भूखे-प्यासे कार्य करने के बावजूद बच्चों के पेट नहीं पाल पाते हैं।