आगरा। ताज ट्रिपेजियम जोन (टीटीजेड) में प्रदूषण नियंत्रण को उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने सात सदस्यीय टास्क फोर्स गठित की है। सात सदस्यीय टीम के प्रत्येक सदस्य को अलग-अलग जिम्मेदारी दी गई है। टीम के कुछ सदस्य शहर के विभिन्न क्षेत्रों में भ्रमण कर बायोमेडिकल वेस्ट, कंडा, टायर, चमड़े की कतरन, लकड़ी, कृषि अपशिष्ट आदि जलाने वाले व्यक्तियों का चालान कर सुसंगत कार्रवाई करेंगे।
टीटीजेड में पर्यावरण को लेकर सुप्रीम कोर्ट सख्त है। तमाम कोशिशों के बावजूद प्रदूषण पर नियंत्रण नहीं लग पा रहा है। शहर में बायोमेडिकल वेस्ट का निस्तारण तो दूर, अब तक इसके कलेक्शन तक की व्यवस्था सुनिश्चित नहीं है। खुले में बायोमेडिकल वेस्ट पड़ा रहता है। पेठा इकाइयों में कोयला भट्ठी प्रयोग में लाई जा रही है।
हालांकि इसकी रोकथाम के लिए समय-समय पर तमाम निर्देश भी दिए गए, लेकिन इस पर अमल नहीं हो पाया। इसको देखते हुए टीटीजेड के अध्यक्ष/मंडलायुक्त के. राममोहन राव ने प्रदूषण करने वाले पर निगरानी के आदेश दिए थे। इस पर क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण अधिकारी अतुलेश यादव ने सात सदस्यीय टास्क फोर्स गठित कर दी है।
ये हैं टीम में
सहायक पर्यावरण अभियंता भुवन यादव, सहायक वैज्ञानिक अधिकारी डॉ. विश्वनाथ शर्मा, अवर अभियंता चंद्रशेखर, वैज्ञानिक सहायक डीएम गौतम, अनुश्रवण सहायक एसडी सिंह, प्रयोगशाला सहायक श्रवण कुमार और विमलेश कुमार।
15 साल पुराने वाहनों पर सख्ती
पिछले दिनों हुई टीटीजेड बैठक में 15 वर्ष से पुराने वाहनों के पुन: रजिस्ट्रेशन की समीक्षा की गई थी। बैठक में आरटीओ आगरा ने बताया कि आगरा संभाग में टीटीजेड क्षेत्र में 15 साल पुराने वाहनों का रजिस्ट्रेशन नहीं किया जा रहा है। वहीं, 3648 वाहनों को टीटीजेड के बाहर संचालित करने के लिए अनापत्ति जारी की गई है। वित्तीय वर्ष में 15 साल पुराने 205 वाहनों का चालान भी किया गया है।