एटा। दूध की कीमतें गिरने के बाद आक्रोश बढ़ता जा रहा है। चिलर प्लांट संचालक हड़ताल पर हैं और दूध की आपूर्ति प्रभावित हो गई है। आलम यह है जिले में दो लाख लीटर दूध का कारोबार ठप हो गया है।
दूध के दाम बढ़ाने की मांग को लेकर चिलर प्लांट संचालक और दूधिया हड़ताल पर हैं। अभी दूधियों का आक्रोश केवल चिलर और दूध कंपनियों तक है, लेकिन अगर दूधिया हड़ताल पर चले जाते हैं तो किल्लत बढ़ सकती है। वहीं चिलर प्लांट बंद होने से दूध की किल्लत का असर दिखने लगा है।
दरअसल दूध कंपनियों ने दूध खरीद के दामों में कटौती कर दी है। चिलर प्लांट संचालक 24 रुपये प्रति लीटर में दूध की खरीद कर रहे हैं। जबकि दूध कंपनियां 18-20 रुपये लीटर से ज्यादा में दूध खरीदने को राजी नहीं हैं।
इसके चलते दूधियों को दूध की सही कीमत नहीं मिल पा रही हैं। दूधियों ने चिलर प्लांट संचालकों को दूध देना बंद कर दिया है। ऐसे में चिलर प्लांट संचालक हाथ पर हाथ रखे बैठे हैं। आलम यह है कि दूध उत्पादक दूध की आपूर्ति केवल घरेलू उपभोक्ताओं तक कर रहे हैं, लेकिन दूध कंपनियों को प्रतिदिन की जाने वाली दो लाख लीटर आपूर्ति ठप पड़ी है। उधर, चिलर प्लांट संचालक भी दूध के दामों को लेकर विरोध में हैं। चिलर प्लांट संचालकों ने सरकार से दूध के दामों में कटौती करने की मांग की है।
वहीं दूध की किल्लत होने से लोगों को भी दिक्कत बढ़ सकती है। दूधियों ने कीमतें बढ़ाए न जाने पर हड़ताल पर जाने का एलान कर दिया है। अगर ऐसा होता है, तो जिले में लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ेगा। चिलर प्लांट संचालक हरेंद्र बताते हैं कि दूध कंपनियों ने दूध के दामों में कटौती कर दिया है। इसके चलते काफी घाटा हो रहा है। ऐसे में काम बंद कर दिया है। जब तक दाम नहीं बढ़ेंगे, तब तक दूध का बिक्री नहीं होगी। चिलर प्लांट के लालकांत यादव कहते हैं कि दुग्ध उत्पादकों में आक्रोश है। जीएसटी और अन्य टैक्स का भी असर दिख रहा है। सरकार को टैक्स में कटौती करनी चाहिए।
आंकड़े
02 लाख लीटर की आपूर्ति की जाती है चिलर को
35 चिलर प्लांटों पर बंद हुआ कारोबार
18 रुपये लीटर दूध खरीद रहीं दूध कंपनियां
45 रुपये लीटर दूध बिक रहा घरों में