मथुरा। उत्तर प्रदेश सरकार ने 480 अफसरों की जांच शुरू करा दी है। विजिलेंस के साथ ही कई दूसरी एजेंसियों को लगाया गया है। यह सभी वह अफसर हैं जिन पर भ्रष्टाचार के आरोप लगे हैं। इस दायरे में मथुरा में तैनात रह चुके अफसर भी आ रहे हैं। इनमें हाईवे चौड़ीकरण और यमुना एक्सप्रेसवे के लिए भूमि खरीद का मामला भी शामिल है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार ने भ्रष्ट अफसरों के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी है। मेरठ के अपर आयुक्त रणधीर सिंह को बर्खास्त करके साफ संदेश भी दे दिया गया है। सरकार ने बिजली विभाग, समाज कल्याण, प्राधिकरण, रजिस्ट्री, तहसील, कलक्ट्रेट, कृषि विभाग और पीडब्लूडी समेत कई विभागों के करीब 480 अधिकारियों के खिलाफ जांच शुरू करा दी है। इन सभी पर भ्रष्टाचार के आरोप लगे हैं। इनमें आगरा से दिल्ली हाईवे, आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे, मथुरा में यमुना एक्सप्रेसवे और हाईवे चौड़ीकरण के लिए जमीन खरीद में गोलमाल के मामले सबसे ज्यादा हैं। अफसरों ने अपने चहेतों को लाभ देने के लिए नियमों की खूब धज्जियां उड़ाई हैं। इनके साथ ही पेंशन, वजीफा, मिड-डे-मील, यमुना रीवर फ्रंट और स्टांप चोरी से जुड़े मामलों की भी जांच शुरू हो गई है।
सरकारी एजेंसियां जांच कर रहीं हैं: श्रीकांत शर्मा
मथुरा। प्रदेश सरकार के प्रवक्ता और ऊर्जा मंत्री श्रीकांत शर्मा ने बताया कि सरकारी एजेंसियां 400 से ज्यादा भ्रष्ट अफसरों की जांच कर रही हैं। किसी दोषी को छोड़ा नहीं जाएगा। सपा सरकार के दबाव में इन अधिकारियों ने सपा नेताओं को फायदा पहुंचाने के लिए जो गोलमाल किया है वह सब साफ होगा। जिस पैसे का गबन हुआ है वह जनता का है और सरकार एक एक पैसा इन अफसरों से वसूल कर लेगी।
मथुरा समेत प्रदेश के 10 जिलों में हुआ वजीफा घोटाला
मथुरा। सपा सरकार में वजीफा घोटाला करने वाले अधिकारी भी जांच के घेरे में आ गए हैं। शिक्षा विभाग और समाज कल्याण विभाग के अधिकारियों की मिलीभगत से ऐसे कालेजों को वजीफा जारी हो गया जो कागजों में थे ही नहीं। कुछ कालेजों में छात्रों की संख्या से ज्यादा वजीफा दिया गया है। कैग ने मथुरा, वाराणसी, आगरा, मुरादाबाद, कानपुर, मेरठ, बरेली, सहारनपुर, झांसी और उन्नाव में जांच शुरू कर दी है। प्रदेश सरकार भी इन जनपदों में शिक्षा विभाग और समाज कल्याण विभाग के अफसरों की जांच करा रही है।