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दिवाली पर होगी करीब 5 करोड़ की आतिशबाजी

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पटाखे
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मैनपुरी। प्रकाश और धूम धड़ाके के त्योहार दिवाली को लेकर तैयारियां पूरी हो गईं हैं। दिवाली पर जिले में करीब पांच करोड़ रुपये की आतिशबाजी होगी। आतिशबाजी की धूम धनतेरस से शुरू हो गई है जबकि दिवालीदिन तो आतिशबाजी की होड़ रहेगी। पूरे दिन आतिशबाजी की दुकानों पर ग्राहकों की भीड़ उमड़ती रही।
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प्रशासन ने किसी हादसे की आशंका को देखते हुए आतिशबाजी बिक्री के लिए तीन दिन के लिए ही लाइसेंस जारी किए हैं। धनतेरस से दिवाली की शाम तक आतिशबाजी की बिक्री की अनुमति दी गई है। शहर के क्रिश्चियन इंटर कालेज मैदान, महावीर मिल परिसर, इटावा रोड पर महारानी लक्ष्मीबाई इंटर कालेज के सामने, गोलाबाजार और रामलीला मैदान में लगाई गईं आतिशबाजी की दुकानों पर बुधवार को देर रात तक खरीदारों की भीड़ लगी रही।

खरीदारों में सर्वाधिक संख्या युवाओं और बच्चों की देखी गई। एक अनुमान के मुताबिक दिवाली पर करीब पांच से छह करोड़ की आतिशबाजी होगी। हालांकि इस बार पिछली बार की तुलना में कम लाइसेंस जारी किए गए हैं लेकिन इससे आतिशबाजी की बिक्री पर कोई खास असर पड़ता नहीं दिख रहा है।
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आतिशबाजी बाजार में आकाशीय आतिशबाजी की मांग अधिक देखी गई। वहीं फुलझड़ी, अनार और चकरी भी खूब पसंद की जा रही है। बुधवार को शाम से ही आतिशबाजी की धूम शुरू हो गई जो गुरुवार को दिवाली को और बढ़ जाएगी।

महंगी होने के बाद भी नई प्रकार की आतिशबाजी खरीदने में लोगों ने विशेष रुचि दिखाई। पिछले वर्षों की तरह इस बार भी रोशनी की अपेक्षा आवाज वाले पटाखों की मांग अधिक है। खरीदारों में लगभग 70 प्रतिशत आवाज वाले पटाखों की मांग करते दिखे। रंगीला, सीको, बादशाह, चीकू, गिन्नी आदि पटाखों की मांग अधिक रही।

महिलाओं और लड़कियों ने रोशनी वाले और आसमान में जाकर रंग-बिरंगी रोशनी करने वाली आतिशबाजी पसंद की। आतिशबाजी विक्रेता आशीष सक्सेना ने बताया कि अनार, बुलेट बम और तेज आवाज के पटाखे अधिक पसंद किए जा रहे हैं। सिंगल शॉट, आसमानी बिजली, फैंसी शॉट, सात कलर शॉट, 12 कलर शॉट, 120 शॉट, पेंटा स्काई जैसी आतिशबाजी भी लोगों की पसंद बनी हुई है।

आतिशबाजी की दुकानों पर कहीं भी सुरक्षा के इंतजाम देखने को नहीं मिले। प्रशासन ने भले ही किसी हादसे की आंशका को देखते हुए आबादी से दूर खुले स्थानों पर आतिशबाजी की दुकानें लगाने की व्यवस्था कराई हो लेकिन तमाम निर्देशों के बाद भी दुकानदारों ने सुरक्षा के कोई इंतजाम नहीं किए।

उधर प्रशासन की ओर से भी इस दिशा में कोई पहल नहीं की गई। ऐसे में यदि कोई हादसा होता है तो जान माल के बड़े नुकसान की आशंका से इंकार नहीं किया जा सकता।
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