कारगिल की विजय गाथा लिखने में अपना योगदान देने वाले जिले के शहीद लांस नायक कुंवर पाल सिंह के परिवार को शासन से आज भी पूरी मदद नहीं मिल पाई। परिवार को पेट्रोल पंप के आवंटन आज तक नहीं हो पाया। परिवार अपना गुजारा शहीद की पेंशन व खेती के माध्यम से कर रहा है।
ग्राम किसरोली निवासी लांस नायक कुंवर पाल सिंह पुत्र करन सिंह कारगिल युद्ध के दौरान आपरेशन रक्षक के दौरान उरी सेक्टर में चोटियों पर छिपे उग्रवादियों एवं पाक सैनिकों से लोहा लेते शहीद हो गए। उनकी शहादत को वर्षों बीत जाने के बाद भी परिवार के सामने गुजर बसर की समस्या है।
शहीद की पेंशन परिवार का सहारा बनी हुई है। इसके अलावा परिवार में 4 बीघा जमीन से थोड़ा बहुत अन्न पैदा हो जाता है उससे ही गुजर बसर होता है। शासन ने शहीदों के परिवार के लिए पेट्रोल पंप देने का जो वायदा किया वह आज तक पूरा नहीं हो पाया। शहीद की पत्नी सरोज कहती हैं कि परिवार किन परिस्थितियों में गुजारा कर रहा है उसकी सुध लेने की फुर्सत किसी के पास नहीं है। बिजली का बिल तक माफ नहीं किया गया। पेंशन से जैसे तैसे परिवार का गुजार हो पाता है। शासन से पेट्रोल पंप देने का जो वायदा किया गया वह आज तक पूरा नहीं हो सका।
पार्क है दुर्दशा का शिकार
कासगंज। ग्राम किसरौली में शहीद की प्रतिमा का अनावरण होने में ही 13 साल का लंबा समय लग गया। उनकी प्रतिमा का अनावरण 20 अगस्त 2013 को भारतीय पूर्व सैनिक संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष लेफ्टिनेंट जनरल बलबीर ने किया। पार्क की उचित देखभाल नहीं की जाती। शहीद की प्रतिमा का चबूतरा तक चटक गया है। इस ओर शासन प्रशासन का ध्यान तक नहीं जाता।
फौज में जाने की तमन्ना रखते हैं शहीद के दोनों बेटे
कासगंज। शहीद कुंवर पाल का बड़ा बेटा विकास अपने पिता की शहादत के समय चार साल का तथा छोटा बेटा विपिन दो साल का। अभी दोनों पढ़ाई कर रहे हैं। दोनों बेटों को अपने पिता की शहादत पर गर्व है। उनमें देश भक्ति का जज्बा हिलोरे मारता है। दोनों ही बेटे सेना में जाने की हसरत रखते हैं।