अलीगंज/एटा। 16 जुलाई 2016, यही वो तारीख है, जो 17 परिवारों के लिए काला दिन बनी थी। जहरीली शराब के कहर ने 17 जिंदगियों को खत्म कर दिया। सरकारों ने मृतकों के परिवारों को मुआवजे का मरहम लगाया, लेकिन वह दर्द आज भी ताजा है। मुआवजा भले ही मिल गया हो, मगर अपने को खोने का दर्द परिवारों को सालता है। यादें, बातें और हकीकतें सब कुछ उनके जेहन को दर्द से भर देती हैं।
सबको देते हैं सीख
अलीगंज के मोहल्ला लुहारी दरवाजा निवासी महीपाल सिंह 45 ने जहरीली शराब से दम तोड़ दिया। महीपाल की मौत से परिवार को बुरी तरह से तोड़ दिया। पत्नी हीरा का हाल तो यह रहा कि वे कुछ दिन तक बेसुध रहीं। सारी जिम्मेदारी बेटे सोनू पर आ गई। परिवार को मुआवजा मिला, लेकिन दर्द आज भी ताजा है। महीपाल के बेटे सोनू अब सबको शराब न पीने की सीख देते हैं।
बेटा नहीं देख सका बाप का मुंह
मोहल्ला लुहारी दरवाजा के ही रमेश की जिंदगी भी जहरीली शराब ने छीन ली। उस वक्त रमेश की पत्नी जय देवी गर्भवती थी। घटना के चार दिन बाद ही जयदेवी ने बेटे को जन्म दिया। इसके साथ ही जय देवी पर तीन बेटियों और दो बेटों की जिम्मेदारी आ गई। बेटा एक साल का हो गया है, लेकिन अपने पिता को बस तस्वीर में देख लेता है। उन्होंने मुआवजे में मिली रकम बेटियों के भविष्य के लिए संजो दी है।
पैरों पर खड़ा हुआ मनीष
शराब कांड में मरने वाले विपिन के बेटे ने किस्मत से दो-दो हाथ किए। पिता की मौत के बाद जिम्मेदारियों का बोझ आया, तो वो निकल पड़ा। मुआवजे की रकम में से एक रिक्शा खरीदकर चलाने लगा। मनीष परिवार के लिए सहारा बना है।
लुहारी दरवाजा के नौ घरों के बुझे चिराग
अलीगंज में हुए शराब कांड में नगर के मोहल्ला लुहारी दरवाजा में अकेले नौ लोगों की मौत हुई थी। पूरे मोहल्ले में मातमी सन्नाटा था। आज भी गाहे-बगाहे लोग घटना के दर्द को भूले नहीं हैं।
आए दिन कार्रवाईयां होती हैं, आए दिन भट्ठियां नष्ट होती हैं और आए दिन शराब नालियों में बहती है, फिर भी मौत के कारोबार पर लगाम नही लग पा रही है। सुबह पुलिस कार्रवाई करती है तो शाम को मौत के सौदागर फिर से मंडी सजाकर बैठ जाते है। जिले में कच्ची शराब का कारोबार चरम पर है वही पुलिस, आबकारी विभाग पूरी तरह से अंकुश लगाने में विफल ही दिखाई देती है।
कच्ची शराब का कारोबार जिले में कुटीर उद्योग बन चुका है। लाख कार्रवाई के बाद भी शराब माफिया बेखौफ कच्ची शराब का कारोबार करते है। कोतवाली देहात, अलीगंज, जशरथपुर, जैथरा क्षेत्र में कई ऐसे गांव है जो अभी इस कारोबार में लिप्त है। हाल में ही एसएसपी अखिलेश कुमार चौरसिया के नेतृत्व में कई जगह कार्रवाई की गई तो हकीकत सामने आई। गांव टपुआ में कच्ची शराब बनती हुई मिली वही अन्य जगह भी शराब पकड़ी गई। शहर में कच्ची शराब के लिए बदनाम मोहल्ला हिंदूनगर में भारी मात्रा में शराब पकड़ी। उसके बाद भी बदस्तूर कच्ची शराब का कारोबार जारी है। पुलिस अभियान चलाकर सुबह कार्रवाई करती है तो शाम को कच्ची शराब के शौकीन लोगों के लिए फड़ सज जाते है।
खाकी पर ही दाग तो कैसे रुके अवैध शराब का धंधा
खाकी के संरक्षण में अवैध शराब का धंधा होता है ऐसे आरोप खाकी पर लगते ही रहते है। हाल में पिलुआ पुलिस ने भारी मात्रा में अवैध शराब पकड़ी। जांच में सामने आया कि कारोबार पुलिसकर्मियों की शह पर ही चल रहा था। एसएसपी ने दो पुलिसकर्मियों के खिलाफ तस्करा भी डाला है इससे पहले भी खाकी पर दाग लगते रहे। कच्ची शराब माफियाओं के लिए खाकी ही मुखबिर की भूमिका भी निभाती है।
आए दिन पकड़ी जा रही शराब
ब्यूरो
एटा। आखिर यह कैसे मान ले कि जिले में अवैध कच्ची शराब का कारोबार रुक गया है। हाल में हुई कार्रवाई में अलीगंज थाना क्षेत्र के गांव टपुआ में तीस लीटर शराब सहित भारी मात्रा में लहन बरामद हुआ वही हिंदू नगर में भी काफी शराब पकड़ी गई।