एटा। बैंक खातों से लेकर प्रापर्टी से आधार कार्ड लिंक कराने का काम पूरे देश में चल रहा है, लेकिन आधार कार्ड से जुड़ा ब्योरा अब उजागर नहीं किया जाएगा। यदि ऐसा हुआ तो तीन साल कारावास की सजा भुगतनी पड़ सकती है। प्रदेश सरकार ने सूबे के सभी डीएम को दिशा निर्देश जारी किए।
शासन के नियोजन विभाग की सचिव नीना शर्मा ने कहा है कि आधार कार्ड नंबर को प्रदर्शित, प्रकाशित या सार्वजनिक रुप से पोस्ट नहीं किया जाएगा। आधार कार्ड धारकों की आधार संख्या को किसी एजेंसी, व्यक्ति या संस्था प्रकाशित, प्रदर्शित और सार्वजनिक नहीं करेगी। ऐसा करने पर तीन साल की कैद की व्यवस्था तत्काल प्रभाव से लागू कर दी गई है।
सरकार ने हाल ही में खसरा-खतौनी को भी आधार कार्ड से लिंक कराने के आदेश दिए थे। अब योगी सरकार ने ब्योरा सार्वजनिक होने पर तीन साल की कैद का प्रावधान कर दिया है।
इस आदेश ने सरकारी कर्मचारियों को असमंजस में डाल दिया है कि आखिर आधार कार्ड लिंक करते समय गोपनीयता बरकरार कैसे रखी जा सकती है। कर्मचारियों का कहना है कि हमे आधार लिंक करने के लिए व्यक्ति सिर्फ आधार कार्ड कही फोटो कॉपी देता है। इससे पहले जीरॉक्स कराते वक्त कोई भी व्यक्ति उसका नंबर ले सकता है।
इस कानून के तहत सरकार ने लागू की व्यवस्था
अनुसूचित आधार अधिनियम , 2016 के अनुच्छेद 29(2), 29(3), 29(4) के तहत आधार संख्या या इससे संबंधित किसी जन सांख्यिकीय सूचना को ऑनलाइन या ऑफलाइन किसी प्रकार से प्रदर्शित, सार्वजनिक, साझा किया जाना या प्रकाशित करना निषेध है। अनुच्छेद 37, 40, 41 के तहत ऐसा करना दंडनीय अपराध होगा। जिसके तहत तीन साल तक की कारावास की सजा का प्रावधान किया गया है।
नियोजन विभाग की सचिव नीना शर्मा का आदेश मिला है। गाइडलाइन आने पर आदेश का अनुपालन कराया जाएगा। प्रदेश सरकार का आदेश पारदर्शिता के साथ गोपनीयता बनाए रखना है। किसी कर्मचारी को घबराने की जरूरत नहीं है।
- अमित किशोर, डीएम