कुसमरा (मैनपुरी)। दो जिलों को जोड़ने वाला नगला केवल से विशनुगढ़ मार्ग पिछले तीस वर्ष से बदहाली के आंसू बहा रहा है। जर्जर हो चुके इस मार्ग की हालत यह है कि यहां वाहन चलाना तो दूर पैदल चलना भी मुश्किल है। बारिश के मौसम में हालात बद से बदतर हो जाते हैं। जबकि आठ किमी के इस मार्ग पर कई विद्यालय, तीन अस्पताल एवं दर्जनों गांव पड़ते हैं।
नगला केवल-विशनुगढ़ मार्ग पर हुए गड्ढों की वजह से आए दिन दुर्घटनाएं होती रहती हैं। दोपहिया वाहन आए दिन फिसलने से लोग चुटैल हो जाते हैं। मैनपुरी और कन्नौज को जोड़ने वाले इस मार्ग पर एक दर्जन से अधिक परिषदीय स्कूल, नौ इंटर कॉलेज और दो डिग्री कॉलेज हैं इन विद्यालयों में बड़ी संख्या में छात्र छात्राएं दूर-दूर से पढ़ने आते हैं। इतना ही नहीं इस मार्ग पर तीन नवीन स्वास्थ्य केंद्र व दो उपकेंद्र भी हैं। यह सड़क ऊंचास्लामाबाद, कुंदनपुर, फुलैया, मदनापुर, रंगपुर, कैथौली, चतुरीपुर गांवों से होती हुई कन्नौज के विशनुगढ़ कस्बे को जाती है।
वहां से हर रोज सैकड़ों वाहन व हजारों लोग गुजरते हैं। इस सड़क का निर्माण 1986 में हुआ था। स्थानीय लोग बताते हैं कि तब मानकों की अनदेखी के कारण दो वर्षों में ही सड़क गड्ढो में तब्दील हो गई थी। इतना ही नहीं उसके बाद भी तीन बार सड़क का निर्माण कार्य कराया गया लेकिन मानकों को ताक पर रखने की वजह से सड़क छह माह में ही गड्ढों में तब्दील हो गई।
स्थानीय निवासी ओमप्रकाश सविता का कहना है कि सालों से खराब इस सड़क की कोई सुनने वाला नही है। जबकि चुनाव में सभी नेता इसे बनवाने का वादा करके जाते हैं। विष्णुपाल का कहना है कि इस मार्ग पर दर्जनों विद्यालय पड़ते हैं जहां हजारों छात्रों को इस मार्ग पर गुजरना पड़ता है।
शिवम चक बताते हैं कि इस मार्ग की मरम्मत भी हुई थी लेकिन खराब गुणवत्ता के चलते मात्र छह माह में ही सड़क फिर से टूट गई। रामजी शाक्य का कहना है कि इस मार्ग पर तीन अस्पताल व दो उपकेंद्र हैं। इनमें मरीजों को जाने में परेशानी का सामना करना पड़ता है, सबसे ज्यादा परेशानी प्रसूताओं को होती है।