मैनपुरी। सपाई दुर्ग में घुसपैठ के लिए तो हर कोई बेताब रहा, लेकिन 25 सालों में आज तक कोई भी इस दुर्ग की दीवारों को पार नहीं कर सका। इस बार चुनाव में दुर्ग की मजबूत दीवारें कमजोर होती दिखाई दे रही हैं। इससे दुर्ग में घुसपैठ का खतरा बढ़ गया है। कहीं न कहीं सैफई परिवार को भी इस बात की भनक लग गई है।
मैनपुरी संसदीय सीट पर सपा की जीत का रास्ता कहीं न कहीं जसवंतनगर विधानसभा से होकर गुजरता है। पिछले चुनावों में इस विधानसभा से सैफई परिवार को हजारों की बढ़त मिलती रही है। इस बार जसवंतनगर में मतदान प्रतिशत गिरने से सैफई परिवार चिंतित है। यादव बाहुल्य इस विधानसभा में पिछले चुनावों में सपा को बंपर वोट मिलते रहे हैं। इस बार जसवंतनगर के मतदाताओं का रुख कुछ बदला नजर आया। शायद इसीलिए इस क्षेत्र में 2014 की तुलना में 10 प्रतिशत मतदान कम हुआ है।
2014 में इस विधानसभा क्षेत्र में कुल 65 प्रतिशत वोट पड़े थे, लेकिन इस बार यह आंकड़ा सिर्फ 55.6 प्रतिशत पर पहुंच गया। चौंकाने वाली बात यह भी है कि यहां पड़ने वाले वोट में एक बड़ा भाग सैफई परिवार को जाता है। 2014 के लोकसभा चुनाव में यहां कुल 2.33 लाख वोट पड़े थे, जिसमें से 80 प्रतिशत यानी 1.87 लाख वोट मुलायम सिंह यादव को मिले थे।
ऐसे में इस बार जब दस प्रतिशत मतदान कम हुआ है तो इसमें सबसे बड़ा नुकसान मुलायम सिंह यादव का ही माना जा रहा है। मतदाताओं की इस नाराजगी की कहानी तो हर कोई अलग-अलग गढ़ रहा है। कोई इसे सत्ताधारी दल की चाल बता रहा है तो कोई सैफई कुनबे की रार को जिम्मेदार ठहराता है। वजह चाहे जो भी हो, लेकिन सपाई दुर्ग की दीवारें इससे कहीं न कहीं कमजोर जरूर हो रही हैं।