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मथुरा में सीएमओ दफ्तर से अंखफोड़वा कांड का रिकार्ड गायब

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डैमो
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मथुरा। मथुरा का बहुचर्चित अंखफोड़वा कांड की पत्रावली सीएमओ दफ्तर से गायब हो गई है। पूरे मामले का खुलासा जनसूचना अधिकार अधिनियम के तहत मांगी गई सूचनाओं से हुआ है। पत्रावली के गायब होने से न्याय की उम्मीद लगाए बैठे उन आठ गरीब लोगों को हताशा हाथ लगी है। जो इस कांड में अपनी आंखों की रोशनी गंवा बैठे हैं।
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वृंदावन के कैलाश नगर कालोनी निवासी हरीश शर्मा ने जनसूचना अधिकार अधिनियम के तहत मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय से छह बिंदुओं पर सूचनाएं मांगी थी। मांगी गई सूचना में पूछा गया था कि जनवरी 2015 में जिस नेत्र परीक्षण शिविर में लोगों ने अपनी आंखों की रोशनी गंवाई वो किस संस्था ने लगाया। शिविर में किस नेत्र परीक्षण अधिकारी की संलिप्तता उजागर हुई।

आरटीआई कार्यकर्ता हरीश शर्मा ने जिला कार्यक्रम प्रबंधक अंधता निवारण ने आधी अधूरी जानकारी उपलब्ध कराई है। दी गई जानकारी में कहा गया है कि ऑपरेशन के बाद अंधे होने की संलिप्तता के आरोपी संबंधी किसी भी नेत्र परीक्षण अधिकारी के संबंध में अभिलेखीय सूचना कार्यालय पत्रावलियों में संकलित नहीं है। हरीश शर्मा ने उत्तर प्रदेश सूचना आयोग में अपील दायर की। इसी मामले में सुनवाई के लिए जनसूचना अधिकारी को तलब किया गया है। सुनवाई 24 अप्रैल को रखी गई है।
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वर्ष 2015 में हुआ था कांड
मथुरा। बांकेबिहारी मानव कल्याणं करोति संस्था द्वारा जनवरी 2015 को चंद्रपुरी धौली प्याऊ में कैंप लगाया था। कैंप में आगरा, मथुरा और राजस्थान के लोग आए।
आयोजित नेत्र परीक्षण शिविर में, जिसमें डाक्टरों की टीम द्वारा किए गए ऑपरेशन के बाद आठ लोगों की आंखों की रोशनी चली गईं थीं। इसके बाद विभागीय स्तर पर कई तरह की जांच के साथ ही विभाग के आला अधिकारियों ने दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई के दावे तो किए लेकिन ये दावे महज हवा हवाई साबित हुए। पीड़ितों के परिजनों की अब न्याय की आस भी टूट गई है। इस संबंध में अंधता निवारण विभाग के नोडल अधिकारी डॉ. पीके गुप्ता ने बताया कि आरटीआई कार्यकर्ता हरीश शर्मा द्वारा पूछे गए प्रश्नों के उत्तर दिए गए हैं। उन्होंने पत्रावली के बारे में कोई प्रश्न नहीं किया था।
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