एटा। हाथ में कलश और पूजा की थाली, नंगे पांव और मन में श्रद्धा लिए भक्त भोले भंडारी के दर्शन को बढ़ते जाते हैं। नंगे पांव में कंकर और कांटे चुभते हैं, फिर भी आस्था डगमगाती नहीं है, लेकिन अव्यवस्थाएं मन को खिन्न जरूर कर देती हैं। घर से साफ मन लेकर भक्त मंदिर पहुंचते हैं, लेकिन जब भगवान के दरबार के आसपास ही कूड़े के ढेर और गंदगी से सामना होता है, तो भी मन विचलित होता है। शहर के सबसे प्राचीन कैलाश मंदिर के आसपास अव्यवस्थाओं का आलम है। श्रावण मास में प्राचीन कैलाश मंदिर में भक्तों की भीड़ उमड़ेगी, लेकिन अब तक मंदिर के आसपास अव्यवस्थाओं को लेकर पालिका और प्रशासन नहीं चेता है।
मनोकामना पूर्ण करने वाला है कैलाश मंदिर
डेढ़ सौ साल पुराना कैलाश महादेव मंदिर जिले का सबसे ऊंचा शिवालय है। 190 फीट ऊंचे शिखर वाले मंदिर का गर्भगृह सौ फीट ऊंचा ही नहीं ठोस भी है। मान्यता के अनुसार तत्कालीन राजा राय बहादुर दिलसुख राव ने राज्य की खुशहाली एवं प्रजा को कष्ट से दूर रखने के लिए 1924 में मंदिर का निर्माण कराया था। किवदंती के अनुसार चौमुखी शिवलिंग कवच बनकर चारों दिशाओं से भक्तों की रक्षा करती है।
इच्छेश्वर महादेव मंदिर पर भी अव्यवस्था
जलेसर के पटना पक्षी विहार स्थित इच्छेश्वर महादेव मंदिर के पास भी कुछ ऐसा ही आलम है। पक्षी विहार के बींचो-बीच बने इच्छेश्वर महादेव की प्रतिमा के अंदर भी मनोकामना पूर्ण करने की विशाल शक्ति है। प्रत्येक वर्ष हजारों श्रद्धालु यहां मनोकामना पूर्ण के लिए आते हैं। श्रद्धा का मुख्य आकर्षण श्रद्धा और भक्ति के साथ शिवलिंग बच्चों की गोद में आ जाती है। लेकिन दंभ और ताकत के वश वालों की गोद में नहीं आती है। श्रावण मास के सोमवार और महाशिवरात्रि में मेला लगता है।