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छह माह में ही जर्जर हो गए शौचालय

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जर्जर पड़ा शौचालय
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एटा। केंद्र से लेकर प्रदेश की सरकार और जिला प्रशासन जिले को ओडीएफ घोषित करने के लिए शौचालयों का निर्माण करा रहा हैं लेकिन उसके बावजूद भी जनप्रतिनिधियों की मनमानियों ने शौचालय निर्माण की धज्जियां उड़ा कर रख दी है। आलम यह है कि सांसद राजवीर सिंह राजू के आदर्श गांव में ही गुणवत्ता को दरकिनार करते हुए शौचालय बनवा दिए गए हैं।
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शीतलपुर ब्लॉक में स्थित सांसद आदर्श गांव करतला में शौचालय निर्माण में खेल किया गया है। एक साल पहले बने शौचालय गुणवत्ता के अभाव में जर्जर हो गए हैं। गांव में वर्ष 2016-17 में 500 से अधिक शौचालय बनवाए गए थे। इन शौचालयों का निर्माण ग्राम निधि खाते में भेजी गई धनराशि से प्रधान और पंचायत सचिव ने कराया। ग्रामीणोें ने बताया कि शौचालय के लिए सामान प्रधान ने भिजवाया था। जिसमें दो बोरी सीमेंट, पटिया और चार बोरी चंबल भेजी गई थी। साथ ही शौचालय के निर्माण के लिए टीन के गेट लगवाए गए थे। लेकिन एक साल में शौचालयों का हाल यह हुआ कि गेट निकल कर हाथ में आ चुके हैं। वहीं कई लोगों के शौचालय जमीन में दफन हो गए हैं। इसके अलावा शौचालयों की दुर्दशा के चलते लोग खुले मेें शौच करने जा रहे हैं। उधर, गांव में कई घरों में शौचालयों का निर्माण हुआ नहीं है। लोग बार-बार प्रधान के पास जाकर शौचालय बनवाने की गुहार लगा रहे हैं, मगर उनको टालकर लौटाया जा रहा है। लोगों ने शौचालय निर्माण और गुणवत्ता की जांच कराने की मांग की है।
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लोग कहते हैं
हमारे घर में शौचालय का निर्माण हुआ था, लेकिन वह दो महीने में ही जमीन में दफन हो गया। अब खुले मेें शौच जाते हैं। प्रधानमंत्री आवास में भी हमारा नाम शामिल नहीं हुआ।
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गिरजाशंकर
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शौचालय निर्माण में गुणवत्ता का ध्यान नहीं रखा गया है। जनप्रतिनिधि ने मनमाने तरीके से सामान भेजकर शौचालय बनवा दिए हैं।
सुषमा देवी
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शौचालय के लिए कई बार गुहार लगा चुके हैं, लेकिन प्रधान हर बार टाल देते हैं। खुले में शौच जाने के लिए मजबूर हैं। गरीबों की कोई नहीं सुनता।
नारायन देवी
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महिला प्रधान, पति देख रहे काम
गांव की प्रधान महिला हैं, लेकिन उनका सारा काम उनके पति संभालते हैं। मामले की जानकारी करने के लिए जब हमने प्रधान आभा वर्मा से बात करनी चाही, तो जबाव मिला कि उनको ही सब पता है। प्रधानपति भरतेंद्र सिंह ने कहा कि शौचालयों का निर्माण गुणवत्तापूर्ण तरीके से कराया गया है। लोग गलत आरोप लगा रहे हैं। लोग शौचालयों की देखरेख नहीं करते।
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पंचायत सचिव भी मनमानी पर उतारू
गांव के पंचायत सचिव भी मनमानी पर उतारू हैं। लोगों का आरोप है कि गांव में शौचालयों और आवास निर्माण में वसूली भी हुई है। गांव में खुली बैठक नहीं होती। पैसा खाते में बंद है।
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कहते हैं अंाकड़े
16 लाख रुपये ग्राम निधि खाते में भेजे गए वर्ष 2016-17 में
दो लाख रुपये से लगीं गांव में सोलर लाइटें
चार लाख रुपये से हुआ सीसी का निर्माण
दस लाख रुपये खाते में पड़े हैं बंद
500 से अधिक शौचालयों का हुआ था निर्माण
150 शौचालय हो गए जर्जर
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