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बैंक कर्मियों ने की हड़ताल

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प्रदर्शन करते बैंककर्मी - फोटो : amar ujala
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मैनपुरी। बैंक कर्मियों ने मंगलवार को एक दिवसीय हड़ताल की। सभी कर्मचारियों ने इलाहाबाद बैंक के सामने धरना दिया। इसके बाद उन्होंने क्रिश्चियन तिराहे तक नारेबाजी करते हुए रैली निकाली।
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यूनियन कर्मचारी यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियन के तहत जिले के सभी बैंक कर्मियों ने एक दिन की हड़ताल की। इस दौरान कर्मचारियों ने सरकार और बैंक प्रबंधकों के खिलाफ नारेबाजी की। वहीं रैली निकालकर प्रदर्शन किया। महाराज सिंह ने बताया कि बैंक कर्मचारियों की यह हड़ताल अपनी जायज मांगों को लेकर है।

सरकार ने अगर मांगों को नहीं माना गया तो यह हड़ताल आंदोलन का रूप ले लेगी। अवधेश श्रीवास्तव ने कहा कि सरकार बैंकों का निजीकरण कर रही है जो गलत है। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक क्षेत्रों के बैंकों का निजीकरण नहीं किया जाना चाहिए। वहीं बैंकों का विलय व समेकन की योजनाओं को रोका जाना चाहिए।
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कोआपरेटिव अर्नाजन आस्तियों को बट्टे खाते से अलग रखा जाए। इसके अलावा बैंक के ऋण चुकाने में जानबूझकर गलती करने वाले को फौजदारी के तहत कार्रवाई की जानी चाहिए। सुबोध कुमार ने कहा कि यह बैंक कर्मचारियों के साथ अन्याय है।

बैंक कर्मचारियों की हड़ताल से पूरे जिले में लगभग 30 करोड़ रुपए का करोबार प्रभावित हुआ। इस दौरान नहीं कोई लेन-देन किया गया और नहीं कोई बैंक कार्य किया गया। हड़ताल से सबसे ज्यादा परेशानी व्यापारियों को उठानी पड़ी। बैंकों में कोई कार्य नहीं होने से व्यापारियों का लेन-देन नहीं हो सका।

मंगलवार को बैंक बंद होने के कारण शहर के ज्यादातर एटीएम भी जवाब दे गए। वैसे ही शहर के अधिकांश एटीएम खराब ही रहते हैं। लेकिन हड़ताल से यह स्थिति और बिगड़ गई। लोग एटीएम से दूसरे एटीएम तक दौड़ लगाते रहे।

लीड बैंक मैनेजर डीके अग्रवाल ने बताया कि बैंक कर्मचारियों की एक दिन की हड़ताल से जिले भर में लगभग 30 करोड़ रुपये का कारोबार प्रभावित हुआ है। इस दौरान बैंक बेद होने के कारण कोई भी लेन-देन नहीं हो सका।
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