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देव शिल्पियों ने रातों रात सीताराम मंदिर का किया था निर्माण

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देव शिल्पियों ने रातों रात सीताराम मंदिर का किया था निर्माण - फोटो : अमर उजाला
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सोरों (कासगंज)।
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देव शिल्पियों की कृति के रूप में विख्यात सोरों सूकर क्षेत्र का सीताराम मंदिर यहां की पौराणिकता का अहम प्रमाण है। मंदिर की पौराणिकता के चलते इस मंदिर के संरक्षण का दायित्व भी पुरातत्व विभाग के अधीन है, लेकिन मौजूदा समय में देव शिल्पियों की यह पौराणिक कृति की नई पीढ़ी को कम ही जानकारी है। सोरों के तीर्थनगरी घोषित होने पर पौराणिक जानकारियां भी जन-जन तक पहुंचेंगी और लोगों को जानकारियां भी मिल पाएंगी।
तीर्थनगरी सोरों के लहरा मार्ग पर सीताराम जी का प्राचीन मंदिर करीब एक हजार ईस्वी के आसपास बना। इस मंदिर के निर्माण को लेकर जनश्रुति है कि पौराणिक काल में देव शिल्पियों ने रातों रात इस विशाल मंदिर का निर्माण कर दिया था। यहां एक यज्ञ शाला भी है। मंदिर के पुरातात्विक महत्व को जानने के लिए मंदिर की खुदाई हुई तो यहां काफी पौराणिक काल की देव मूर्तियां प्राप्त हुईं। मंदिर की प्राचीनता को देखते हुए इसके संरक्षण का जिम्मा पुरातत्व विभाग को सौंपा गया। इस मंदिर का इतिहास सोलंकी राजवंश से भी जुड़ा है।
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बताया जाता है कि राजा सोलंकी यहां यज्ञ शाला में यज्ञ करते थे। एटा गजेटियर में इस मंदिर का निर्माण एक हजार ईस्वी के बाद ही माना जाता है। सीताराम मंदिर के शिलालेख के अनुसार इसका जीर्णोद्धार संवत 1245 में हुआ। वर्तमान समय में इस मंदिर की पौराणिक मूर्तियां मंदिर के इतिहास को जानने की जिज्ञासा पैदा करतीं हैं। जो श्रद्धालु मंदिर दर्शन को पहुंचते हैं। वे मंदिर की प्राचीनता पर आश्चर्य जताते हैं।
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इतनी पौराणिक महत्व के मंदिर और प्राचीन महत्व की इमारतें और मंदिर होने के बावजूद तीर्थ नगरी पर्यटन के मानचित्र में नजर नहीं आती। जो तीर्थनगरी के वाशिंदों को अरसे से कचोटती है।
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