जीएसटी लगने के बाद कपड़ा बाजार बेरौनक हो गया है। देश के सबसे बड़े कपड़ा निर्यातक शहर सूरत में कपड़े पर जीएसटी के विरोध में बाजार बंद होने के चलते जिले में भी माल का आयात नहीं हो पा रहा है। इसके चलते कपड़ा व्यापारी भी हाथ पर हाथ रखे बैठे हैं।
पहले कपड़े पर टैक्स नहीं था, इसलिए जीएसटी लागू होने से पहले ही कपड़ा व्यापारियों ने इसका विरोध शुरू कर दिया था। एक जुलाई से जीएसटी लागू होने के बाद सूरत, आगरा समेत तमाम जगहों पर आंदोलन और तेज हो गए। विरोध के चलते सूरत की कपड़ा मिलों में ताले पड़ गए हैं, इससे वहां से कपड़े का आयात नहीं हो पा रहा है।
जीएसटी में सूती कपड़ों, धागे पर पांच फीसदी कर लगाया गया है, जबकि मानव निर्मित धागे को 18 फीसदी के दायरे में रखा गया है। इसके अतिरिक्त एक हजार रुपये से अधिक कीमत के परिधानों पर 12 फीसदी कर लगाया गया है। एक दर न होने से व्यापारी सबसे ज्यादा आक्रोशित हैं।
जिले के कपड़ा व्यापारी आगरा और सूरत से माल लाते हैं। यहां बंद के चलते माल नहीं मिल पा रहा है। इसलिए कपड़ा व्यापारी अभी पुराने स्टॉक पर ही कारोबार कर रहे हैं। कपड़ा व्यापारी बबलू कुरैशी ने बताया कि अलग-अलग जीएसटी दरों से दिक्कत हो रही है। अब तक कुछ समझ नहीं आ रहा। बौबी गुप्ता का कहना है कि सूरत में हड़ताल से जिले में नया माल नहीं आ रहा है। साड़ी विक्रेता नीरज जैन कूकी का कहना है कि जीएसटी लगने के बाद व्यापार पर बुरा असर पड़ा है। रेडीमेड व्यापारी जहीर खान ने बताया कि कपड़ा बाजार में सन्नाटा है।