एटा। राष्ट्रीय बाजार योजना के तहत अब किसान अपनी फसल बिचौलियों को दरकिनार कर देश के किसी कोने में बैठे पंजीकृत व्यापारी को बचे पाएंगे। फसल की ऑनलाइन बोली लगेगी। इस योजना को धरातल पर उतारने की तैयारी चल रही है। इसके लिए मंडलीय अफसरों ने मंडी सचिवों को निर्देश जारी कर दिए हैं।
प्रकृति आपदाआें के कारण बदहाली की मार झेल रहे किसानों को केंद्र सरकार ने डिजिटल इंडिया से जोड़ कर बड़ी राहत देने का काम किया है। योजना के तहत देश के किसी कोने में बैठा पंजीकृत व्यापारी अब बोली लगा कर अधिक दाम देकर किसान से सीधे फसल खरीद सकेगा। इसके लिए देश भर की मंडियों को नेटवर्क से जोड़ने की कवायद शुरू हो गई है। योजना से 69 फसलों को जोड़ा गया है। मंडी सचिव एटा ने बताया कि एसेसिंग लैब और ई-प्लेफार्म का निर्माण अंतिम चरण में है। नेटवर्क से कनेक्ट होते ही जिले के किसान अपनी फसल ऑनलाइन बेच पाएंगे।
ऐसे बिकेगी फसल
योजना के तहत जैसे ही किसान अपनी फसल लेकर मंडी आएगा उसका अस्थाई पंजीकरण हो जाएगा। मंडी गेट के कांटे पर वजन होते ही किसान को पर्ची और लॉट नंबर मिल जाएगा। इसके बाद किसान अपना उत्पाद ई-प्लेटफार्म पर रखेगा। इस बीच लाट से मार्केटिंग इंस्पेक्टर सैंपल लेकर एसेसिंग लैब में उसकी जिंसवार गुणवत्ता मानक के अनुरूप जांच कर उसकी ग्रेडिंग कर पोर्टल पर डालेगा। पोर्टल पर माल की ग्रेडिंग होते ही फसल ऑनलाइन बिकने के लिए तैयार हो जाएगी। इसके बाद जिला, प्रदेश, राष्ट्रीय स्तर पर फसल की बोली लगाई जाएगी। बोली में केवल पंजीकृत व्यापारी ही शामिल होेंगे। बोली लगने के बाद किसान और व्यापारी के बीच एक अनुबंध तैयार कर किसान के खाते मे रकम भेज दी जाएगी।