एटा। सरकारी अस्पतालों में शव वाहनों की कमी के चलते मृतक के शव को कंधे पर लाद कर ले जाने की कई घटनाएं सामने आने के बाद शासन ने बड़ा फैसला लिया है। अब शव को कंधे पर नहीं ढोना पड़ेगा। सभी सरकारी अस्पतालों में शव वाहन उपलब्ध कराए जाएंगे। सामाजिक संस्थाओं के माध्यम से शव वाहनों की व्यवस्था भी कराई जाएगी।
सरकारी अस्पताल में शव वाहन नहीं मिलने पर बहुत से लोगों को मृतक को अपने कंधे या गोद रखकर में ले जाने पड़े थे। शासन ने इस पर रोक लगाते हुए बड़ा फैसला लिया है। शासन के प्रमुख सचिव प्रशांत त्रिवेदी ने चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाओं के महानिदेशक, डीएम, सीएमओ, सीएमएस को जारी निर्देश में कहा है कि अब जिला अस्पताल से लेकर महिला अस्पताल, पीएचसी, सीएचसी के अधीक्षक शव वाहन संचालित करने वालों की सूची तैयार करेंगे। अपरिहार्य स्थितियों में स्वास्थ्य विभाग के अफसर शव वाहन संचालकों से संपर्क करेंगे और मृतक के परिवारीजनों को शव वाहन उपलब्ध कराएंगे।
सीएमएस सुविधादाता की भूमिका निभाएंगे। शव वाहन सेवा की जरूरतमंदों को लाभ पहुंचाने के लिए हर जिले में एक नोडल अधिकारी नामित किया जाएग। शासन ने डीएम और सीएमओ को स्वयं सेवी संस्थाओं, क्लब, सोसाइटी, ट्रस्ट से संपर्क कर शव वाहनों की व्यवस्था करने के निर्देश दिए हैं।
स्वास्थ विभाग के पास सिर्फ एक शव वाहन
स्वास्थ्य महकमे के पास जिले में सिर्फ एक शव वाहन है। जबकि दूसरा शव वाहन एक निजी संस्था का है। सामाजिक संस्था के सदस्य अमित चौहान डीजल खर्च पर शव वाहन उपलब्ध कराने के साथ अज्ञात शवों का अपने खर्च पर अंतिम संस्कार भी कराते हैं।
सरकारी अस्पताल में मौत पर निशुल्क सुविधा
सीएचसी, पीएचसी, जिला अस्पताल में मौत होने पर स्वास्थ्य विभाग शव घर तक पहुंचाने के लिए निशुल्क शव वाहन की व्यवस्था करेगा। इसके अलावा शव परिवहन सेवा के सभी वाहनों का विवरण चालक का पता, फोन नंबर, नोडल अधिकारी का मोबाइल नंबर और आपात नंबर की सूची सरकारी अस्पतालों में चस्पा की जाएगी।
जिला अस्पताल में सिर्फ एक शव वाहन की व्यवस्था है। शव वाहन का संचालन करने वाली संस्थाओं की सूची बनाने के लिए अस्पताल के लिए शव वाहन खरीदे जाएंगे। शासन के निर्देश का अनुपालन सुनिश्चित कराया जाएगा।
डा. आरसी पंाडेय, सीएमओ एटा