मैनपुरी/दन्नाहार। किसी ने सच ही कहा कि गुरु कभी भी कार्योें से मुक्त नहीं होता है। बल्कि उसकी जिम्मेदारियां समाज के प्रति और बढ़ जाती हैं। इस कहावत को सच कर दिखाया है गुरुकुल नौनेर के सेवानिवृत्त गुरु सत्यपति मिश्र ने।
गुरुकुल नौनेर से 2009 में सत्यपति मिश्र सेवानिवृत्त हो गए थे। इसके बाद भी वह बच्चों के प्रति समर्पित हैं। वह आज भी अपने घर में संस्कृत की पाठशाला लगाकर बच्चों को पढ़ा रहे हैं। वर्तमान समय में उनके पास 34 बच्चे पूर्व मध्यमा और उत्तर मध्यमा के हैं। वहीं सेवाकाल के दौरान उन्होंने दो दर्जन से अधिक बच्चों की पढ़ाई का खर्चा खुद उठाया है। आर्थिक रूप से कमजोर बच्चों की पढ़ने में न केवल आर्थिक मदद की है बल्कि अपनी लाइब्रेरी से उन्हें पुस्तकें भी दीं।
उन्होंने बताया कि उन्होंने 2002 में उत्तर प्रदेश संस्कृत बोर्ड से पूर्व और उत्तर मध्यमा की मान्यता ली है। वहीं सरकार और विभाग से कोई सहायता न मिलने के चलते उनकी पेंशन भी इसी कार्य में लग जाती है। आर्थिक सहायता न मिलने पर वह उदास नजर आए। फिर भी वह बच्चों को पढ़ाने से संतुष्ट हैं। वर्तमान शैक्षिक हालात पर उनका कहना है कि अब सम्मान न केवल खरीदे जाते हैं बल्कि राजनीतिक पहुंच के आधार पर हासिल भी किए जाते हैं।