गोवर्धन। मथुरा को आने वाले हर रास्ते पर भगवान गिरिराज के जयकारे गूंज रहे थे। चाहें बस स्टैंड हो या फिर रेलवे स्टेशन। हर तरफ परिक्रमार्थियों की ही भीड़ थी। शाम होते- होते गोवर्धन में भक्ति और भाव का समुद्र उमड़ने लगा था। प्रशासन के मुताबिक पहले दिन करीब छह लाख लोग परिक्रमा करने पहुंचे। बुधवार से यह संख्या बढ़कर दस लाख तक हो जाएगी।
मंगलवार से मुड़िया पूर्णिमा मेला शुरू हो गया। सुबह से ही गिरिराज भक्तों के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया था। देवशयनी एकादशी भी थी लिहाजा बड़ी संख्या में लोगों ने परिक्रमा लगाई। दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, मध्यप्रदेश और उत्तराखंड से भी बड़ी संख्या में लोग पहुंचे थे। तमाम लोग अपने परिवार के साथ गिरिराज जी की शरण में आए।
धौलपुर निवासी नरेश अपने भतीजे मोनू और सोनू के साथ दंडवती परिक्रमा लगाने पहुंचे थे। नरेश ने बताया कि वह पंद्रह साल से परिक्रमा लगा रहे हैं। आज वह जो भी हैं गिरिराज महाराज की कृपा से ही हैं। मेहंदीपुर निवासी चंदन सिंह अपने सात साल के बेटे बिजेंद्र के साथ दंडवती परिक्रमा लगा रहे थे।
चंदन सिंह ने बताया कि वह एक साल में तीन बार परिक्रमा लगाने आते हैं। गिरिराज भगवान से उन्होंने जो भी मांगा है वह मिला है। कोटा के सूरज सोनी अपनी पत्नी अनोखी सोनी के साथ लड्डू गोपाल को लेकर परिक्रमा लगा रहे थे। वह भी सुबह ही गोवर्धन पहुंच गए थे। दिल्ली से कारोेबारी विपिन सारंग अपनी मम्मी और पिता को लेकर पहुंचे।
विपिन ने बताया कि उनकी मम्मी और पापा की बड़ी इच्छा थी कि वह गोवर्धन की परिक्रमा लगाएं। गाजियाबाद से वेदपाल सिंह, नोएड़ा से विनय सारंग और अलीगढ़ से विजय कुमार अपने परिवार के साथ परिक्रमा लगाने पहुंचे थे।
राधे राधे करते गोवर्धन पहुंचे युवा
गोवर्धन। परिक्रमा को बड़ी संख्या में युवा भी पहुंचे थे। सभी की जुबान पर राधे राधे था। इन लोगों ने परिक्रमा की शुरुआत भी गिरिराज के जयकारों के साथ की थी। इनका कहना था कि वह पिछले तीन साल से परिक्रमा लगाने के लिए आ रहे हैं। कृष्ण की भक्ति में जो आनंद है वह कहीं नहीं हैं।