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जवाहर बाग पर फेल अफसरों को नहीं मिली ‘अच्छी कुर्सी’

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पुनीत शर्मा
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मथुरा। जवाहर बाग को खाली कराने में नाकाम रहने वाले पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों को सरकार महत्वपूर्ण विभाग देने से बच रही है। मार्च 2014 से 2 जून, 2016 तक जो भी आईएएस और आईपीएस मथुरा में तैनात रहे हैं उनमें से अधिकांश को साइड लाइन कर दिया गया है। जो एसएसपी थे वह पीएसी में भेज दिए गए जबकि डीएम उपेक्षित विभागों में तैनात कर दिए गए हैं।


मथुरा के जवाहर बाग में 2 जून, 2016 को हुई हिंसा में तत्कालीन एसपी सिटी मुकुल द्विवेदी और थानाध्यक्ष संतोष यादव समेत 29 लोगों की मौत हो गई थी। इस हिंसा ने प्रदेश ही नहीं बल्कि देश की सियासत को हिला दिया था। प्रदेश सरकार से लेकर उन सभी पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों पर आरोप लगे थे जो मार्च, 2014 से हिंसा वाले दिन तक तैनात रहे थे। क्योंकि रामवृक्ष यादव मार्च, 2014 में अपने साथ करीब 500 लोगों को लेकर मथुरा पहुंचा था और जवाहर बाग पर कब्जा कर लिया। मगर पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी जवाहरबाग को खाली नहीं करा पाए थे। इस दौरान 3 डीएम विशाल चौहान, बी चंद्रकला, राजेश कुमार और एसएसपी पद पर अखिलेश कुमार मीणा, मंजिल सैनी, डा. राकेश कुमार रहे।
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विशाल चौहान से सरकार ने दो दिन पहले ही विद्युत उत्पादन निगम और ट्रांसमिशन कार्पोरेशन के एमडी का चार्ज वापस ले लिया है। बी चंद्रकला केंद्रीय प्रति नियुक्ति पर चली गई हैं। जबकि हिंसा के वक्त डीएम रहे राजेश कुमार कौशल मिशन के एमडी हैं। अखिलेश कुमार भी केंद्रीय प्रति नियुक्ति पर चले गए थे। मंजिन सैनी पीएसी में तैनात हैं। हिंसा के वक्त एसएसपी रहे डा. राकेश कुमार भी पीएसी लखनऊ में कमांडेंट हैं। जिक्र केवल इनका ही नहीं इस दौरान एसपी सिटी और एडीएम रहे अधिकारी भी कहीं अच्छी पोस्टिंग नहीं पा सके हैं। हालांकि सभी अधिकारी पोस्टिंग के लिए हाथ-पैर मार रहे हैं मगर अभी तक किसी को भी महत्व वाले विभागों में तैनाती मिल नहीं पाई है।
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सीबीआई जांच के दायरे में आ रहे 50 अधिकारी
मार्च 2014 से 2 जून 2016 तक तैनात रहने वाले सभी अधिकारी सीबीआई जांच के दायरे में भी आ रहे हैं। इनमें अधिकांश दिल्ली जाकर सीबीआई के समक्ष अपने बयान दर्ज करा भी चुके हैं। जबकि कई अधिकारी बुलाए जा रहे हैं। मथुरा में शुक्रवार को भी सीबीआई ने पुलिस और प्रशासनिक रिकार्ड चेक किए। जवाहर बाग हिंसा से जुड़े दस्तावेजों को पढ़ा जा रहा है।
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