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जीएसटी से पहले ठंडा पड़ा बाजार

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GST
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एटा। प्रस्तावित जीएसटी को लेकर बाजारों का माहौल बदल गया है। दुकानदारी से ज्यादा इन दिनों नई व्यवस्था की चर्चाएं हो रही हैं। ब्रांडेड सामानों की आर्डर के बाद भी डिलीवरी नहीं हो रही है। 15 जून से कंपनियां माल नहीं दे रहीं। इसके चलते बाजार सुस्त हो गया है।
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जीएसटी की दस्तक से खचाखच रहने वाले बाजारों में इन दिनों रौनक नहीं दिख रही। कारोबार से ज्यादा जीएसटी को लेकर सवाल जवाब हो रहे हैं। दुकानों पर सामान नहीं है तो ग्राहक भी नदारद है। आंदोलन की भनक से भी कारोबार प्रभावित हैं। इलेक्ट्रॅानिक, इलेक्ट्रिकल, ऑटो मोबाइल, सेलफोन, सौंदर्य प्रसाधन आदि से जुड़े कारोबारी हाथ पर हाथ धरे बैठे हैं।

व्यापारियों की माने तो अॅार्डर के बाद भी माल नहीं मिल रहा। कंपनियां डिलीवरी नहीं कर रहीं। सबसे ज्यादा किल्लत ब्रांडेड सामान की है। कंप्यूटर व्यवसाई सत्येंद्र राजपूत ने बताया कि दिल्ली के कंप्यूटर मार्केट में माल नहीं मिल रहा। ऐसे में स्थानीय ग्राहकों को संतुष्ट करना मुश्किल हो रहा है। अब तो जीएसटी लागू होने का इंतजार है। हालांकि वाणिज्य कर विभाग जिला, तहसील एवं नगर मुख्यालयों पर खुली बैठकों, सेमिनार एवं कार्यशालाओं से व्यापारियों का भ्रम दूर करने की कोशिश कर रहा है।
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कम दाम पर बेच रहे बचा सामान
जीएसटी लागू होने की तिथि करीब आते ही व्यापारियों में बचे माल को लेकर चिंता है। व्यापारी जीएसटी के जानकारों एवं वकीलों से संपर्क कर रहे हैं। बिना बिलिंग के माल को लेकर लोग परेशान हैं। कुछ व्यापारी बचे हुए स्टॉक को कम दाम पर बेच कर झंझट से निजात पाने कोशिश कर रहे हैं।


25 से ख्ुाली वेबसाइट, नए जीएसटी पंजीयन शुरू
जिले के 90 प्रतिशत वैट पंजीकृत व्यापारियों के माइग्रेशन के बाद अब नए पंजीकरण 25 जून से शुुरू हो चुके हैं। नि:शुल्क प्रक्रिया में मोबाइल नंबर, ई-मेल आईडी, पैन कार्ड, खाता संख्या के साथ व्यापार स्थल का साक्ष्य अपलोड करना है। बताते चलें कि वैट के अंतर्गत जिले में 5200 से अधिक व्यापारी पंजीकृत थे।

ऑन लाइन व्यवस्था को राहत भरा मान रहे हैं व्यापारी
सिंगल विंडो टैक्स, ऑन लाइन सिस्टम एवं ई वेबिल व्यवस्था से पढ़े लिखे कारोबारी खुश हैं। नई समाधान योजना, यूनीफार्म रिटर्न के साथ 75 लाख सीमा के साथ ही 20 लाख से अधिक टर्न ओवर पर जीएसटी पंजीयन को भी ठीक मानते हैं। इनका कहना है कि इससे जहां इंस्पेक्टर राज पर अंकुश लगेगा। वहीं ऑटो मॉनीटरिंग, पोर्टल डिस्प्ले एवं रेंडम आडिट से पारदर्शिता बढ़ेगी।
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