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गड्ढा मुक्त सड़कों का सपना कैसे होगा पूरा

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गड्ढा मुक्त सड़कों का सपना कैसे हो पूरा - फोटो : अमर उजाला
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मैनपुरी।
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जिला भले ही अच्छी सड़कों के मामले में लखनऊ के बाद आता हो लेकिन वास्तविकता यह है कि अभी भी देहात में कई प्रमुख सड़कें ऐसी हैं जिन पर चलने में आदमी की हड्डियों से आवाज आने लगती है। इसका कारण यह है कि जिले में गड्ढा मुक्त सड़कों के लिए मांगी गई राशि का मात्र एक तिहाई पैसा ही मिला है। इसके चलते 75 फीसदी सड़कें ही अभी तक गड्ढा मुक्त हो सकी हैं।


मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सड़कों को गड्ढा मुक्त करने की घोषणा के बाद जिले में 543 सड़कें ऐसी चिह्नित की गई थीं। जिन्हें गड्ढा मुक्त किया जाना था। 14 जून शाम तक इनमें से 75 फीसदी सड़कों को गड्ढा मुक्त किया जा चुका था। इसके बाद भी दर्जनों महत्वपूर्ण सड़कें अभी भी जर्जर और गड्ढा युक्त रह गई हैं। इस संबंध में लोकनिर्माण विभाग के अधिकारी बताते हैं कि शासन से लक्ष्य पूरा करने के लिए 30 करोड़ रुपये की राशि मांगी गई थी। इसमें से मात्र अभी तक 9.70 करोड़ रुपये की राशि ही विभाग को मिली है। इसके बाद भी लक्ष्य का 75 प्रतिशत कार्य पूरा कर लिया गया है। इस संबंध में लोकनिर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता डीके चौधरी ने बताया कि शासन से मिले लक्ष्य के अनुरूप तेजी से कार्य किया जा रहा है।
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शासन के निर्देशों के अनुसार जिलेभर की सड़कों को गड्ढा मुक्त कराने का अभियान चल रहा है। जिला लखनऊ के बाद दूसरे नंबर पर है। जो सड़कें शेष रह गई हैं उन्हें भी शीघ्र ही गड्ढा मुक्त कर दिया जाएगा। इसके लिए लोकनिर्माण विभाग के अधिकारियों को निर्देश जारी कर दिए गए हैं।
-यशवंत राव, डीएम मैनपुरी
लक्ष्य मिला-1342.70 किमी सड़कें करनी थीं गड्ढा मुक्त
कार्य हुआ- 1164.65 किमी सड़कें अब तक हुई गड्ढा मुक्त
मांगी गई राशि- कुल 30 करोड़ रुपये
मिली राशि- कुल 9.70 करोड़ रुपये
मिट्टी डालकर भरे जा रहे डामर की सड़क के गड्ढे
कुसमरा। दो जिलों को जोड़ने वाला नगला केवल से विशुनगढ़ मार्ग पिछले 30 वर्ष से बदहाली के आंसू बहा रहा है। इस खबर को अमर उजाला ने प्राथमिकता से प्रकाशित किया तो सड़क पर मिट्टी डालकर गड्ढे भरे जाने लगे।

जर्जर हो चुके इस मार्ग की हालत यह है कि यहां वाहन चलाना तो दूर पैदल चलना भी दुश्वार है। बारिश के मौसम में हालात बद से बदतर हो जाते है। जबकि आठ किमी के इस मार्ग पर दर्जनों विद्यालय व तीन अस्पताल एवं दर्जनों गांव पड़ते है। नगला केवल- विशुनगढ़ मार्ग विकास खंड किशनी का एक महत्वपूर्ण मार्ग है। इस पर हुए गड्ढों की वजह से आएदिन दुर्घटनाएं होती हैं। दोपहिया वाहन आएदिन फिसलने से लोग चुटैल होते रहते हैं।

मैनपुरी और कन्नौज को जोड़ने वाले इस मार्ग पर एक दर्जन से अधिक परिषदीय स्कूल व नौ इंटर कॉलेज एवं दो डिग्री कॉलेज हैं इस मार्ग पर तीन नवीन स्वास्थ्य केंद्र व दो उपकेंद्र भी हैं। इस मार्ग पर ऊंचास्लामाबाद, कुंदनपुर, फुलैया, मदनापुर, रंगपुर, कैथौली, चतुरीपुर गांवों से होती हुई कन्नौज के विशुनगढ़ कस्बे को जाती है। इस सड़क का निर्माण 1986 में हुआ था। स्थानीय लोग बताते है कि तब मानकों की अनदेखी कारण दो वर्षों में ही सड़क गड्ढो में तब्दील हो गई थी। पिछले दिनों इस संबंध में समाचार प्रकाशित होने के बाद सड़क के गड्ढों को मिट्टी से भरा जाने लगा है।

साहब मेरी भी सुनों गड्ढों की सड़क है या सड़क में गड्ढे
नगर के ग्वालियर-बरेली राजमार्ग से शमशेरगंज जाने वाला सात किमी मार्ग वर्षों से बदहाल है। इस रास्ते पर वाहन या पैदल जाने वाले लोग यही नहीं जान पाते है कि गड्ढों में सड़क है या सड़क में गड्ढे। बरसात होने पर तो इस पर निकलना ही मुश्किल है। वृद्ध ईश्वर दयाल बताते है कि यह मार्ग कन्नौज, इटावा जनपद को जोड़ता है। इसलिए इस मार्ग पर आवागमन रात दिन रहता है। इस मार्ग को 1984 में बनवाया गया था। तब ठीक था और लंबे समय तक चल भी गया।

हेमचंद्र बताते है कि उन्होंने इस मार्ग को दुरुस्त करवाने के लिए कई बार शिकायतें कीं लेकिन नतीजा सिफर रहा। हां इतना जरूर है कि कागजों में मार्ग सही हो गया। मोतीलाल का कहना है कि यह मार्ग व्यापारिक दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण है। इस रास्ते से ही व्यापारी वर्ग कानपुर और लखनऊ जाते थे लेकिन मार्ग बदहाल होने के चलते लोग दस से पंद्रह किमी घूमकर जाते है। सुरेंद्र शाक्य का कहना है कि तीन वर्ष पूर्व लोकनिर्माण विभाग ने इसकी मरम्मत करवाई थी। मरम्मत के एक माह बाद ही उखड़ने लगी थी। पैचिंग का काम भी मानकों के हिसाब से नहीं हुआ। मिट्टी डालकर गड्ढे बंद कर दिए गए थे। वर्तमान में पूरा मार्ग जर्जर हो चुका है। यहां से गुजरना दर्दभरा होता है।


तीन वर्षों में ही धराशाई हो गई सड़क
नगर पंचायत ज्योति खुड़िया से संपर्क मार्ग कमलपुर तक जाने वाली सड़क पिछले तीन वर्षों से बदहाल है। इस पर वाहन चलना तो दूर पैदल चलना भी मुश्किल है। हालात यह हैं कि लगभग पांच किलोमीटर का सफर तय करने में दो से तीन घंटे लग जाते हैं। लोग कई बार निर्माण कराने की मांग कर चुके हैं लेकिन कोई सुनवाई नहीं होती है। ज्योंति से संपर्क मार्ग कमलपुर तक जाने वाली सड़क की कुल लंबाई लगभग पांच किलोमीटर है। यह सड़क कुरावली और ज्योति को जोड़ती है।
इस सड़क पर एक दर्जन से अधिक गांव पड़ते हैं। यही नहीं कई परिषदीय विद्यालय, इंटर कॉलेज तक इस मार्ग पर स्थित है। इसके चलते बड़ी संख्या में विद्यार्थी के साथ ही लोगों का भी आवागमन रहता है। इस मार्ग पर गांव कमलपुर हीरापुर, सूरजपुर, मनोना, नगला बाग, अशोकपुर, नगला हंसी, नगला मोहन स्थित हैं। इसके चलते उक्त गांव के लोग बड़ी संख्या में कुरावली ज्योति जाने के लिए इस मार्ग से गुजरते हैं। बारिश के मौसम में इस मार्ग पर हालात बद से बदतर हो जाते हैं। 2013 में बनी यह सड़क पूरी तरह से लगभग ध्वस्त हो चुकी है।

- मनोना निवासी जय सिंह का कहना है कि तीन साल में ही सड़क खराब हो गई। जो विधायक या सांसद बन जाता है वह इधर मुड़कर कभी नहीं देखता।

- गांव मनोना निवासी भूपेंद्र सिंह का कहना है इस मार्ग से जाने वाले लोगों को अच्छी खासी परेशानी होती है। वाहन चलाना तो दूर पैदल निकलना मुश्किल है। क्योंकि यह सड़क पूरी तरह से खराब हो चुकी है।

- नगला बाग निवासी सौरभ सिंह बताते हैं कि इस मार्ग पर मानक के अनुसार कार्य नहीं किया गया। इसलिए यह सड़क जल्दी से ही धराशाई हो गई। पूरी सड़क में गड्ढे बन गए हैं।

- ज्योंति निवासी अंचल कुमार ने बताया इस मार्ग पर प्राथमिक विद्यालय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय पूर्व माध्यमिक विद्यालय इंटर कॉलेज जाने वाले छात्र-छात्राओं को परेशानी का सामना करना पड़ता है सड़क खराब होने के कारण लोग दूसरे रास्ते से होकर जाते आते हैं ।

जिले में गड्ढा मुक्त सड़कों के लिए शासन से बात की जाएगी। बड़ी संख्या में देहात क्षेत्र में सड़कें जर्जर हैं। इसके लिए विशेष राशि स्वीकृत करने और सड़कों को बनवाने की मांग की जाएगी।
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-ब्रजेश कठेरिया, विधायक किशनी

मुख्यमंत्री ने प्रदेशभर की सड़कों को गड्ढा मुक्त करने के निर्देश दिए हैं। इसके लिए शासन से भरपूर पैसा स्वीकृत किया गया है। यदि कहीं पैसे की कमी के कारण सड़कें गड्ढा मुक्त होने से रह गई हैं तो उन्हें अलग से राशि जारी करवा कर मरम्मत कराई जाएगी।
-रामनरेश अग्निहोत्री, विधायक भोगांव
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