कश्मीरी बाजार की खास गली में चल रहे कोठे में तीन लड़कियां कैद हैं। उनसे जबरन देह व्यापार कराया जा रहा है। कोठे से मुक्त होकर पंचशील आश्रय गृह पहुंची एक युवती ने यह खुलासा किया है। अब संस्था के पदाधिकारी अन्य युवतियों को कोठे से मुक्त कराने के प्रयास में जुटे हैं। इस मामले में जल्द ही पुलिस के उच्चाधिकारियों को जानकारी देकर कार्रवाई कराई जाएगी।
कश्मीरी बाजार क्षेत्र में 15-20 दिन पहले स्वास्थ्य विभाग के एक जागरूकता कार्यक्रम के संबंध में एक संस्था के कार्यकर्ता प्रचार के लिए पहुंचे थे। कार्यकर्ता की मुलाकात एक युवती से हुई। उसने एक पर्ची थमा दी। पर्ची में लिखा था कि मुझे कोठे में कैद करके रखा गया है। मुझे यहां से निकाल लो। इस पर कार्यकर्ता ने कई दिन तक उस युवती से गुपचुप तरीके से मुलाकात की। दो दिन पहले युवती कोठे से भाग निकली। कार्यकर्ता ने उसे पंचशील आश्रय गृह में पहुंचा दिया। काउंसलिंग के दौरान युवती ने बताया कि वह पुणे की रहने वाली है। उसकी उम्र तकरीबन 20 साल है। छह साल पहले एक महिला उसे घुमाने के बहाने अपने साथ ले आई थी। इसके बाद बसई में रखा, जहां उसका सौदा कर दिया। इसके बाद उसे कश्मीरी बाजार के कोठे में लाकर जबरन देह व्यापार कराया जाने लगा। कोठों पर उसका उत्पीड़न किया जाता है। कोठों से बाहर जाने पर मारपीट की जाती है। जिस कोठे पर उसे रखा गया, वहां तीन और लड़कियां हैं। इनमें एक 16 साल की है। वह भी अपने घर जाना चाहती हैं, लेकिन उन्हें निकलने नहीं दिया जा रहा है। युवती ने उन्हें भी मुक्त कराने की मांग की।
पुलिस की मिलीभगत से चल रहे कोठे
काउंसलिंग के दौरान युवती ने खुलासा किया कि कोठों का संचालन पुलिस की मिलीभगत से होता है। कोठों पर देह व्यापार की सूचना पुलिस को है, लेकिन दलाल पुलिस तक रकम पहुंचाते हैं। इसलिए छापे पड़ने से पहले ही कोठे तक जानकारी पहुंचा दी जाती है।
दिल्ली की संस्था कर चुकी है छापेमारी
दिल्ली की रेस्क्यू फाउंडेशन कोठों में कई बार छापेमारी मर चुकी है। कई लड़कियों को मुक्त कराया जा चुका है। इसके बावजूद फिर से कोठे शुरू हो जाते हैं। पुलिस की ओर से कोई कार्रवाई नहीं की जाती है।