फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

इस जिले में 241 शिक्षकों की जाएगी नौकरी, बर्खास्तगी से बचने को लगवाई थी बीएसए दफ्तर में आग

Sat, 07 Dec 2019 12:48 PM IST
मुकेश कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
विज्ञापन
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन
आगरा के डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय की बीएड सत्र 2004-05 के फर्जी प्रमाणपत्र निरस्त हो जाएंगे। यह निर्णय शुक्रवार को विश्वविद्यालय की कार्य परिषद की बैठक में लिया गया। ऐसा हो जाने का सबसे पहला असर यह होगा कि आगरा जिले में 241 शिक्षकों की नौकरी से छुट्टी हो जाएगी। 
विज्ञापन


परिषदीय विद्यालयों के इन शिक्षकों की बीएड की डिग्री फर्जी पाई गई थी लेकिन तिकड़म करके बचे हुए हैं। जब नोटिस जारी किए गए तो आठ अक्तूबर को बीएसए दफ्तर में ही आग लगवा दी गई थी। 

अब विश्वविद्यालय ने बीएड सत्र 2004-05 की फर्जी अंकतालिकाएं निरस्त करने का फैसला लिया है। जब डिग्री ही निरस्त हो जाएगी तो बर्खास्तगी से बचने का रास्ता बंद हो जाएगा। बीएसए के लिए इनकी छुट्टी करना बहुत आसान हो जाएगा।
विज्ञापन

आगरा में 241 शिक्षक फर्जी पाए गए

दरअसल, एसआईटी ने पिछले साल लगभग 4500 रोल नंबर जारी किए थे। इन्हें बेसिक शिक्षा परिषद भेजा गया। वहां से चिह्नित हुआ कि फर्जी डिग्री वालों में से 2500 टीचर बने। इन्हें बीएसए को भेजा गया। 

इन 2500 में से आगरा में 241 पाए गए। इनमें से अगर किसी की डिग्री असली होगी तो वो 15 दिन के अंदर इसका सुबूत विश्वविद्यालय के सामने रख देगा और कार्रवाई से बच जाएगा। हालांकि अब तक किसी ने साक्ष्य नहीं दिया है।

परीक्षा दी 8000 ने, मार्कशीट मिली 12500 को

एसआईटी ने जांच में पाया कि 2004-05 में विश्वविद्यालय में बीएड की कुल सीटें 8000 थीं। इतने ही अभ्यर्थियों का पंजीकरण हुआ। परीक्षा भी इतनों ने ही दी। इतना ही नहीं। रिजल्ट भी आठ हजार का ही जारी हुआ लेकिन मार्कशीट 12500 को दे दी गई। तब मार्कशीट एजेंसी ने बनाई थी। 

एसआईटी में जांच अधिकारी रहे रमेश सिंह ने बताया कि हमने विश्वविद्यालय से चार्ट मांगे। इनमें आठ हजार का रिजल्ट मिला। फिर मार्कशीट का रिकॉर्ड मांगा। इसमें 12500 मिलीं। दोनों का मिलान कर 4500 फर्जी मार्कशीट और डिग्री चिह्नित कर ली गईं।

कॉपी में 15 अंक, मार्कशीट में 85

एसआईटी ने विश्वविद्यालय से रिकॉर्ड लेकर कॉपियों तक की पड़ताल की। अभ्यर्थियों के अंक नोट किए गए। ऐसे केस मिले जिनमें कॉपी में 15 अंक थे, लेकिन अंक पत्र में 75 थे। चार्ट में छेड़छाड़ कर अंक बढ़ाए जाने के 1100 मामले पकड़ में आए थे। इसका नतीजा यह हुआ कि मेहनत करके पास होने वाले रह गए और फर्जीवाड़ा करने वालों को सरकारी नौकरी मिल गई।

तो एक साथ बर्खास्त होते 2500 शिक्षक 

एसआईटी की सूची के आधार पर परिषदीय स्कूलों में तैनात शिक्षकों को वर्ष 2017 से ही नोटिस दिया जा रहा है। अभी तक सभी जिलों में कार्रवाई नहीं हो पाई है। बड़ा कारण डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से अंकतालिकाओं को निरस्त न किया जाना था। अगर निर्णय पहले हो जाता तो प्रदेश में एक साथ 2500 शिक्षक बर्खास्त होते। अब तक 1500 की छुट्टी हो चुकी है। 

कॉलेजों ने मैनेजमेंट कोटा बढ़ाकर किया खेल

यह खेल निजी कॉलेजों ने किया था। उस समय बीएड के लिए मारामारी थी। अच्छा खासा पैसा मिल रहा था दाखिलों पर। निजी कॉलेजों ने आवंटित सीटों से ज्यादा दाखिले गए। इसके लिए मैनेजमेंट कोटा अपनी मर्जी से बढ़ा लिया। सोचा, बाद में मंजूरी करा लेंगे, लेकिन ऐसा हो न सका।
विज्ञापन

दो कॉलेजों ने अभी तक नहीं दिया ब्योरा

बीएड सत्र 2004-05 के टेबुलेशन चार्ट में कुल 84 कॉलेजों कॉलेजों के 12,472 छात्रों के परिणाम अंकित हैं। जांच में दो कॉलेज फर्जी पाए गए। 82 कॉलेजों के 8030 छात्रों ने प्रवेश लिया। हाईकोर्ट में सुनवाई के लिए सभी कॉलेजों से प्रवेश का ब्योरा मांगा गया। 

अभी तक विश्वविद्यालय प्रशासन को 80 कॉलेजों का ब्योरा मिल पाया है। दो कॉलेज अभी भी बाकी हैं। कुलसचिव के मुताबिक दोनों कॉलेजों को दो बार रिमाइंडर भेजा जा चुका है, तीसरा रिमाइंडर भेजा जाएगा।

कुल 4570 छात्रों की अंकतालिकाएं फर्जी व टेंपर्ड

एसआईटी की ओर से जुलाई 2017 में दी गई रिपोर्ट के अनुसार बीएड सत्र 2004-05 में  कुल 4570 छात्रों को विश्वविद्यालय की फर्जी अंकतालिका वितरित की गईं। विश्वविद्यालय के टेबुलेशन चार्ट में 3517 विद्यार्थियों का अधिक परीक्षा परिणाम जारी किया गया। इसी प्रकार 1053 छात्रों को टेंपर्ड अंकतालिकाएं वितरित की गईं।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें