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देश के नामचीन अखाड़ों का अलग-अलग है महत्व

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कासगंज। देश में तमाम नामचीन साधुओं के अखाड़े हैं। इनमें से उत्तराखंड, हरिद्वार और गुजरात के अखाड़ों का अलग महत्व है। यहां के नागा साधु सोरों की शोभायात्रा में आकर्षक प्रदर्शन करते हैं। इन अखाड़ों के महंत और गिरी कार्यक्रमों की तैयारियों में लगे हैं। महंतों की मानें तो नागा सैन्य पंथ से ताल्लुक रखते हैं।

निरंजनी अखाड़ा, जूना अखाड़ा, अटल अखाड़ा, आनंद अखाड़ा, पंचायती बड़ा अखाड़ा, महानिर्वाणी अखाड़ा सहित 16 अखाड़े बताए गए हैं। इन अखाड़ों में से गुजरात के निरंजनी अखाड़ा, उत्तराखंड के जूना अखाड़ा, हरिद्वार के महानिर्वाणी अखाड़ों का विशेष महत्व है। इन अखाड़ों के श्रद्धालुओं ने सोरों में डेरा जमा लिया है और शोभायात्रा की तैयारियों को अंतिम रूप देने में जुटे हुए हैं। सोरों के नागालैंड अखाड़े के महंत सीताराम तिवारी ने बताया कि मुख्य अखाड़ों के महंतों ने शोभायात्रा की तैयारियों का खाका खींच लिया है। पिछली सालों की अपेक्षा इस साल और भी बेहतर प्रदर्शन होंगे।
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निरंजनी अखाड़ा
कासगंज। यह अखाड़ा गुजरात के मांडवी में स्थापित हुआ था। इनके ईष्ट देव भगवान शंकर के पुत्र कार्तिक स्वामी हैं। इनमें दिगंबर स्वामी और महामंडलेश्वर होते हैं। इनकी शाखाएं, इलाहाबाद, उज्जैन, हरिद्वार, त्रयंबकेश्वर और उदयपुर में हैं।

महानिर्वाणी अखाड़ा
कासगंज। इस अखाड़े की स्थापना हरिद्वार में नीलधारा के पास हुई थी। इनके इष्टदेव कपिल मुनि हैं। इसके अलावा इस अखाड़े से पंचाग्नि अखाड़ा, नागपंथी गोरखनाथ अखाड़ा, वैष्णव अखाड़ा पंचायती बढ़ा अखाड़ा भी इस अखाड़े से ताल्लुक रखते हैं।
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जूना अखाड़ा
कासगंज। यह अखाड़ा सन 1945 में उत्तराखंड के कर्णप्रयाग में स्थापित हुआ था। इसे भैरव अखाड़ा भी कहते हैं। इनके इष्टदेव रुद्रावतार दत्तात्रेय हैं। इनका केंद्र वाराणसी के हनुमान घाट पर भी है। हर साल इस अखाड़े के साधु सोरों की शोभायात्रा की अगुवाई करते हैं।
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