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अंतिम समय में अपने हुए पराए

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अंतिम समय में अपने हुए पराए - फोटो : अमर उजाला
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कासगंज।
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बुढ़ापे की लाठी के सहारे की उम्मीद में उसने अपने परिजनों के लिए जीवन न्यौछावर करने वाले वृद्धाश्रम में रह रहे एक वृद्ध ने दम तोड़ दिया। वृद्ध आश्रम के संचालकों की मानें तो इस वृद्ध के सगे परिजनों ने कोई मतलब न होने की बात फोन पर कह दी, लेकिन वृद्ध की मौत की सूचना पर कुछ खानदान के लोगों को सूचना मिली तो उन्होंने अंतिम संस्कार किया।
यह दर्द भरी दास्तां वृद्धाश्रम में रहने वाल वृद्ध ब्रह्मदेव (70) की है। ब्रह्मदेव मूल रूप से पड़ोसी जनपद के एक कस्बे के रहने वाले हैं। उन्होंने स्वयं विवाह नहीं किया अन्य भाइयों के साथ ही वह रहते थे। उन्होंने अपनी सारी संपत्ति भी परिवार को समर्पित कर दी। पिछले माह 9 नवंबर को वृद्ध का एक भतीजा उन्हें यहां के वृद्धाश्रम में छोड़ गया। वृद्धाश्रम में वृद्ध रहने लगे। वह काफी बीमार थे। वृद्धाश्रम में उनका इलाज भी हुआ जिससे कुछ सेहत में सुधार भी हुआ। फिर हालत खराब हुई और शुक्रवार की सुबह उनकी मौत हो गई। वृद्धाश्रम से वृद्ध की मौत की खबर परिवार को दी तो वृद्ध के सगे परिजनों ने कोई मतलब न होने की बात कह दी। अन्य वृद्धों को जब यह जानकारी हुई तो वह आहत हो गए। बताया गया कि वृद्ध के खानदान के दूसरे लोग उनका लेने पहुंचे।
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वृद्धाश्रम में छाया शोक
कासगंज। वृद्धाश्रम में अन्य वृद्ध भी थे। एक साथी की मौत के बाद अन्य बुुजुर्ग भी दुखी दिखाई दिए। दो बुजुर्गों ने अपना दर्द भी बयां किया। बुजुर्ग ओमप्रकाश ने कहा कि हमारे परिवार का एक सदस्य चला गया। हम बेसहारा का घर वृद्धाश्रम है, हमें काफी दुख है। वृद्धा रामादेवी ने बताया कि ब्रह्मदेव अन्य बुजुर्गों से काफी घुल मिल गए थे पूरे वृद्धाश्रम में शोक छा गया है।
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- वह बीमार थे। काफी इलाज कराया। शुक्रवार को उनकी मौत हो गई। परिवार के लोगों को फोन किया तो उन्होंने स्पष्ट कह दिया कि उन्हें कोई मतलब नहीं। खानदान के कुछ सदस्य पहुंचे और वृद्ध का शव ले गए। नीरज निगम, अधीक्षिका, वृद्धाश्रम।
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