जिले में तमाम ऐसी शख्सियत ने जन्म लिया है जिन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर मुकाम पाया है। ऐसी ही शख्सियतों में राष्ट्रीय कवि के रूप में कवि बलवीर सिंह रंग का नाम ऐसा रहा जो देश में जाना गया।वे पूर्व प्रधानमंत्री अटलजी, हरिवंश राय बच्चन व अन्य नामचीन कवियों के साथ मंच साझा करते थे। उनकी काव्य रचनाएं आज भी लोग जुबान पर गुनगुनाते हैं।
14 नवंबर 1911 को बलवीर सिंह का जन्म जिले के अमांपुर ब्लॉक के गांव नगला कटीला में एक किसान परिवार में हुआ था। बचपन से ही उनकी काव्य के प्रति रुचि थी। गांव की गलियों से खेलते गुनगुनाते हुए वे शहर की ओर निकले। आज भी उनके परिवार के लोग इस गांव में रहते हैं। रंग जी भले ही हमारे बीच में नहीं हैं, लेकिन उनकी कविताएं आज भी उन्हें जीवंत बनाए हैं। उन्होंने सिंहासन, प्रवेश गीत सांझ सकारे, संगम, गंध रचती छंद, शारदीय जैसे कई कविता संग्रह उन्होंने लिखे।
उनकी चर्चित कविताओं में मेरे पास न आओ में सिंहासन हूं, सुख समृद्धि के नाम युद्ध का ज्ञापन हूं, सत्ताधीशों की सांसों का सहचर हूं, भीतर वैसा नहीं कि जैसा बाहर हूं। युवाओं को प्रेरित करते हुए कवि रंग ने लिखा कि ओ जीवन के थके पखेरू उड़े चलो हिम्मत मत हारो, पंखों में भविष्य बंदी है मत अतीत की ओर निहारो।
नेताजी सुभाष ने दिया था उपनाम रंग
कासगंज। बलवीर सिंह रंग को उपनाम रंग नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने दिया। 1940 में नेताजी एटा आए थे। इस दौरान कवि बलवीर सिंह रंग ने कविता पाठ किया। इस कविता पाठ से नेताजी काफी प्रभावित हुए और उन्होंने बोला बलवीर तुमने रंग जमा दिया अब से तुम्हारा नाम बलवीर सिंह रंग होगा।
- कवि रंग देश के उन कवियों में से हैं। जिन्होंने किसानों, पीड़ितों की आवाज को कविता का रूप दिया। उन्होंने अपने काव्य पाठ के माध्यम से पूरे देश में धाक जमाई और इस इलाके का नाम रोशन किया- डा. अखिलेश चंद्र गौड।
- कवि रंग की कविताएं ऐसी हैं जो हर किसी पर अपनी छाप छोड़तीं हैं। आज भी तमाम कवि उनकी कविताओं के तुकांत चोरी करते हैं। कवि रंग के कविता संग्रहों का शासन को संरक्षण करना चाहिए और देश के संग्रहालयों में काव्य संग्रह मिलने चाहिए। दविंद्र चंडौक।
- कवि रंग का पूर्व प्रधानमंत्री अटलजी, हरिवंश राय बच्चन व देश के अन्य कवियों से काफी याराना था। वे उन्हीं के साथ मंचों पर कविता पाठ करते थे और उनकी कविताओं के प्रशंसकों की लंबी लाइन थी। अखिलेश सक्सेना, निर्झर कवि।