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जनपद में खामोशी से चल रहा पटाखों का कारोबार

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एटा। दशहरा और दीपावली का त्योहार निकट है। त्योहारों पर अतिशबाजी के लिए धमाके के धंधेबाज सक्रिय हो गए हैं। चोरी छिपे घरों, दुकानों और खेतों में आतिशबाजी बनाने का काम युद्ध स्तर पर चल रहा है। कई जगहों पर बगैर लाइसेंस पटाखे बनाए जा रहे हैं। जिनके पास लाइसेंस हैं, वो भी मानकों को ताक पर रखे हुए हैं, लेकिन इस सबसे पुलिस प्रशासन और अग्निशमन विभाग बेखबर बना हुआ है।

जिले में करीब 25 लोगों के पास ही पटाखा बनाने का लाइसेंस है। शहर से दूर सैनिक पड़ाव पर लगने वाले आतिशबाजी बाजार में सजने वाली अस्थाई दुकानों से चंद दिनों में ही करोड़ों का कारोबार होता है। इन दिनों दशहरा को देखते हुए ज्यादातर पटाखे बनाने का काम छोटे-छोटे कमरों में चल रहा है और इन्हें बनाने के लिए दो-तीन लोग मजदूरी पर लगे हुए हैं।
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यहां बनने वाले पटाखे व ऑर्डर पर तैयार होने वाले बम जिला व आसपास के क्षेत्रों में ही सप्लाई होते हैं। सस्ते दामों पर आतिशबाजी खरीदने के लालच में लोग सीधे इनके घरों पर ही दस्तक देते हैं। शहर में ही नहीं अलीगंज, मिरहची आदि जगहों पर चोरी छिपे खेतों, घरों में पटाखा बनाने का काम शुरू हो गया हैै, लेकिन पुलिस और अग्निशमन विभाग को बारूद के ढेर दिखाई नहीं दे रहे।


पहले हो चुके हैं हादसे
तीन साल पहले थाना नयागांव क्षेत्र में अवैध रूप से घर में पटाखे बनाए जा रहे थे। वहां विस्फोट से घर की छत उड़ गई थी, दंपती घायल हो गए थे। नूंहखेड़ा में सालों पहले पटाखा बनाते समय विस्फोट हुआ था, जिसमें दो लोग मारे गए थे। थाना अलीगंज में करीब दो साल पहले चोरी छिपे घर में पटाखा बनाए जा रहे थे। जहां हुए विस्फोट से कई लोग घायल हो गए थे।
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दो साल पहले शहर के बूरामंडी क्षेत्र में एक दुकान में पटाखा बनाते समय विस्फोट होने से युवक की मौत हो गई थी। जबकि अन्य लोग घायल हुए थे। अलीगंज में पिछले वर्ष अवैध पटाखा फैक्ट्री में आग लगने से युवक की मौत हो चुकी है। गांव कंसुरी में आतिशबाजी बनाते समय चार लोगों की मौत हुई थी।
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