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15 हजार हेक्टेयर जमीन रह गई प्यासी

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एटा।
जिले में सरकारी 148 ट्यूबवेल खराब पड़े हैं, जिससे जिले के 15 हजार हेक्टेयर भूमि पर सिंचाई नहीं हो पा रही है। किसानों को खेती के लिए परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

नलकूप विभाग ने जिले में 518 ट्यूबवेल अलग अलग ब्लॉक में लगा रखे हैं। लेकिन सिर्फ सही 370 ट्यूबवेल ही हैं। जिनसे किसान अपने खेत में सिंचाई कर पा रहा है। लघु एवं सीमांत किसानों की सिंचाई व्यवस्था चरमराई हुई है।
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सरकारी ट्यूबवेल खराब होने की वजह से किसान निजी नलकूपों के भरोसे हैं, जहां उसे 100 से 150 रुपये प्रति घंटा की दर से भुगतान करने को मजबूर होना पड़ रहा है। ऐसे में छोटे किसानों की फसलें सूख जाती हैं और उन्हें उत्पादकता के हिसाब से उपज नहीं मिल पाती है।

नलकूप विभाग 148 खराब पड़े नलकूपों में से मात्र 18 को ही सुधार की श्रेणी में रखे हुए है। जिनको सही कराने की बात की जा रही है। अन्य में 25 नलकूप फेल बताए हैं जो रीबोर हो सकते हैें। अगर सभी खराब नलकूपों को सुधारने की प्रक्रिया अपनाई जाती तो किसानों को सिंचाई के लिए भटकना नहीं पड़ता।

वर्ष 2005 मेें एक नलकूप से होती थी 100 हेक्टेयर में सिंचाई
वर्ष 2005 तक लगने वाले नलकूपों से डेढ़ क्यूसेक पानी निकलता था। एक नलकूप 100 हैक्टेयर जमीन की सिंचाई के लिए पर्याप्त होता था। वर्ष 2005 के बाद लगने वाले नलकूप 50 क्यूसेक पानी निकासी के लगाए गए। दोनों ही स्थितियों को देखा जाए तो 50 हजार हैक्टेयर जमीन खराब पड़े नलकूपों से सिंचाई की व्यवस्था थी। विभाग की लापरवाही के कारण छोटे किसानों के साथ छलावा किया जा रहा है।
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जिले में 518 नलकूप हैं, जिनमें से 148 नलकूप खराब पड़े हैं। 18 नलकूपों को सही कराने के प्रयास किये जा रहे हैं। 25 नलकूपों का रीबोर हो सकता है, जिनकी जांच कराई जा रही है। 106 नलकूपों को परित्याग कर दिया गया है।
- लक्ष्मण सिंह, अधिशासी अभियंता

ये हैं आंकड़े:-
518 कुल नलकूप
370 चालू नलकूप
106 नलकूपों का परित्याग
25 नलकूप फेल रीबोर की गुंजाइश
18 नलकूप सुधारने के प्रयास

ब्लॉक में नलकूपों की स्थिति
ब्लॉक कुल खराब
शीतलपुर 47 13
निधौली कलां 61 30
सकीट 27 26
मारहर 52 05
अवागढ 04 -
जलेसर 20 20
जैथरा 92 17
अलीगंज 87 19
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