मैनपुरी। जनपद में बुखार से पीड़ित मरीजों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। विभाग के पास दवा तो पर्याप्त है, लेकिन कर्मचारियों की कमी के कारण समय से व्यवस्थाओं का संचालन नहीं हो पा रहा है।
जनपद का मलेरिया विभाग कर्मचारियों की कमी से जूझ रहा है। विभागीय अभिलेखों पर यदि नजर डालें तो पता चलता है कि विभाग में एमपीडब्लू के 89 पद सृजित हैं, जिनमें से मात्र आठ पर एमपीडब्लू की तैनाती है। 81 पद रिक्त चल रहे हैं।
एमपीडब्लू पर ग्रामीण अंचल में मलेरिया की दवा वितरण करने, स्लाइड बनाना आदि काम की जिम्मेदारी होती है। जनपद में स्वास्थ्य पर्यवेक्षक के 63 पद सृजित हैं। जिसके सापेक्ष मात्र 28 की तैनाती है। 35 पद रिक्त चल रहे हैं। जिसके चलते ग्रामीण अंचल में मलेरिया कार्यक्रमों की निगरानी भी सही ढंग से नहीं हो पा रही है।
इसके अतिरिक्त मलेरिया विभाग में लैब टेक्निशियन के 14 पद सृजित हैं, जिनमें से मात्र छह की तैनाती है।
प्रधानों को सौंपी गई है डीडीटी छिड़काव की जिम्मेदारी
विभाग में कर्मचरियों की कमी के कारण स्वास्थ्य विभाग ने डीडीटी ग्राम प्रधानों को उपलब्ध करा दी है। छिड़काव के लिए ग्राम प्रधान व एएनएम के संयुक्त खातों में धनराशि भेजी गई है, हालांकि बताया जा रहा है कि ग्राम प्रधान विभाग का इस कार्य में सहयोग नहीं कर रहे है। जिसके चलते दिक्कतें आ रही हैं।
जिला मलेरिया अधिकारी एसएन सिंह कहते हैं कि बड़ी संख्या में कर्मचारियों की कमी चल रही है। इसके बाद भी सरकारी योजनाओं को हर संभव समय से संचालन का कार्य किया जा रहा है। मलेरिया की रोकथाम के लिए डीडीटी का फोकल स्प्रे कराया जा रहा है। इसके अतिरिक्त आशा व एएनएम के माध्यम से स्लाइड भी तैयार कराई जा रही हैं।