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जीएसटी से कांच उद्योग में कच्चे माल के बढ़े दाम

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कांच कारखाना - फोटो : अमर उजाला
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फिरोजाबाद। कांच उद्योग की जीएसटी लागू होने के बाद मुश्किलें बढ़ गई हैं। कांच उद्योग में व्यापक पैमाने पर प्रयोग होने वाला कच्चे माल से लेकर केमिकल तक सब कुछ महंगा हो गया।
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सुहागनगरी के परंपरागत चूड़ी उद्योग को केंद्र ने जीएसटी में भले ही कर मुक्त की श्रेणी में रखा है लेकिन कांच और चूड़ी बनाने में प्रयोग होने वाले कच्चे माल और केमिकल की दरों में वृद्धि होने से उत्पादन लागत में बढ़ोतरी हुई है। उद्यमियों का कहना है कि गुजरात व राजस्थान से आने वाले कच्चे माल व केमिकल पर अबतक हमें मात्र पांच प्रतिशत ही टैक्स देना पड़ता था।

जीएसटी लागू होने के बाद यह टैक्स बढ़कर 18 प्रतिशत पहुंच गया है। कच्चे माल व केमीकल पर टैक्स की रेट अधिक होने के कारण उत्पादन लागत कितनी बढ़ेगी, इसका आंकलन किया जा रहा है। इधर जीएसटी लागू होने के बाद रॉ मैटेरियल की उपलब्धता भी कम हो रही है, जिससे उत्पादन पर भी प्रभाव पड़ रहा है। रॉ मैटेरियल व केमीकल की रेट व उत्पादन लागत बढ़ने से उद्यमी परेशान है।
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बोले उद्यमी, कांच उद्योग की बढ़ गई हैं मुश्किलें
उद्यमी पीके झिंदल ने कहना है कि जीएसटी लागू होने से कांच उद्योग की मुश्किलें बढ़ गई हैं। चूड़ी उत्पादन में प्रयोग होने वाले कच्चे माल की कीमतें करीब पांच प्रतिशत तक बढ़ोतरी हुई है। जीएसटी लागू होने के बाद पर्याप्त मात्रा में रॉ मैटेरियल उपलब्ध नहीं हो रहा है। जीएसटी में कच्चा माल महंगा होने से निश्चित तौर पर उत्पादन लागत बढ़ेगी।

उद्यमी अनुराग मित्तल का कहना है कि कांच उद्योग में भंगार, सोडाएस, रेता, केमिकल का व्यापक पैमाने पर होता है। भंगार पर पहले जहां मात्र पांच प्रतिशत टैक्स लगता था, जीएसटी लागू होने के बाद वह 18 प्रतिशत हो गया है। सोडाएस पर 14.50 प्रतिशत टैक्स था, वह भी बढ़कर 18 प्रतिशत हो गया है। इससे कांच उत्पादन की लागत पहले की अपेक्षा बढ़ी है।

उद्यमी अरुण जैन का कहना है कि जीएसटी लागू होने के बाद सोडा एस पर करीब एक हजार रुपये टन की बढ़ोतरी हो चुकी है। केमिकल पर भी 18 प्रतिशत टैक्स कर दिया है। इससे चूड़ी उद्योग पर अधिक प्रभाव पड़ेगा।
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