मथुरा। शिक्षकों की भर्ती में हुए बड़े फर्जीवाड़े के मामले में जिला बेसिक शिक्षाधिकारी कार्यालय (बीएसए) एक बार फिर सवालों के घेरे में है। इस बार उंगली डा. आंबेडकर विश्वविद्यालय आगरा की फर्जी बीएड डिग्री के सहारे चयनित शिक्षकों पर होने वाली कार्रवाई को लेकर उठ रहीं है। सचिव बेसिक शिक्षा का इस संदर्भ में जारी आदेश बीएसए कार्यालय में उलझ कर रह गया है।
मंडलीय सहायक शिक्षा निदेशक आगरा के स्तर से इसी माह के प्रथम सप्ताह में जिला बेसिक शिक्षाधिकारी मथुरा को करीब 4700 उन शिक्षकों की सूची की सीडी दी थी, जिनकी बीएड डिग्री को एसआईटी में फर्जी माना गया है। यह शिक्षक 2004-05 के शैक्षिक सत्र के बीएड डिग्री धारक हैं।
सचिव बेसिक शिक्षा रूबी सिंह ने साफ निर्देश दिए थे कि उक्त सीडी से जनपद के शिक्षकों का मिलान करते हुए सूची 15 जनवरी तक शासन को उपलब्ध करा दी जाए। 30 जनवरी तक संबंधित शिक्षकों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए रिपोर्ट मांगी थी, लेकिन मथुरा जनपद में इस सूची का मिलान अभी भी उलझा हुआ है। यह सूची अब तक खंड शिक्षाधिकारी कार्यालय तक भी नहीं भेजी गई है।
जनपद में ऐसे शिक्षकों की संख्या 80 से 103 के मध्य या इससे भी अधिक होने की संभावना है। पूर्व में भी इस सूची के मिलान दौरान बीएसए आफिस में फर्जी भर्ती के गिरोह ने हेराफेरी कर दी थी। सिर्फ 54 शिक्षकों के नाम ही उजागर किए गए थे। इस बार भी शिक्षकों के नाम के मिलान में हो रही देरी तमाम चर्चाओं को जन्म दे रही है। बीएसए चंद्रशेखर का कहना है जांच चल रही है, जल्द सूची भेज दी जाएगी।