एटा। अपनों ने ठुकराया तो गैर ने खून देकर किशोरी की जान बचाने की कोशिश की। मानसिक रूप से दिव्यांग किशोरी को शहर के नई बस्ती निवासी आकाश ने खून दान कर मदद की। निधौलीकलां क्षेत्र में चार दिन पहले मिली मानसिक रूप से परेशान किशोरी को आगरा से लौटा दिया गया था। अब पुलिस उसका जिला अस्पताल में इलाज करा रही है।
कस्बा निधौलीकलां स्थित अस्पताल में वृद्ध महिला ने मानसिक रूप से दिव्यांग किशोरी को चार अक्तूबर को इलाज के लिए भर्ती कराया था। भर्ती कराने के बाद महिला किशोरी को छोड़कर चली गई। जानकारी पर पुलिस ने महिला हेल्प लाइन कर्मचारियों से संपर्क किया। महिला हेल्पलाइन कर्मचारियों ने किशोरी को जिला अस्पताल में भर्ती कराया।
जिला अस्पताल में चिकित्सकों ने खून की कम मात्रा होने के चलते आगरा रेफर कर दिया। इस पर महिला हेल्पलाइन टीम ने किशोरी को आगरा एसएन मेडिकल कालेज में भर्ती कराया लेकिन एक दिन बाद ही एसएन प्रशासन ने उसे लौटा दिया। इसके बाद एटा की महिला हेल्पलाइन ने किशोरी को फिर जिला अस्पताल में भर्ती कराया।
जिला अस्पताल में पहुंची किशोरी के लिए महिला हेल्पलाइन और निधौलीकलां से आई महिला कांस्टेबल से चिकित्सकों ने खून की व्यवस्था कराने के लिए कहा। इस पर ब्लड बैंक में दर्ज रक्तदाताओं से संपर्क किया गया। इसमें आकाश गुप्ता पुत्र छोटेलाल निवासी नई बस्ती ने जिला अस्पताल पहुंच कर बेसहारा किशोरी को खून दिया।
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नाम तो लिखा दिया मगर...
एटा। मानसिक रूप से दिव्यांग किशोरी के लिए ओ नेगेटिव ब्लड की जरूरत थी। ब्लड बैंक में संपर्क करने पर महिला हेल्पलाइन टीम से कर्मचारियों ने खून न होने की बात कही। इस पर ब्लड बैंक में दर्ज रक्तदाताओं से फोन पर संपर्क किया गया।
इसमें से अधिकांश लोगों ने कहा कि उनका नाम गलत लिखा है और किसी ने दूसरा बहाना बनाते हुए मना कर दिया। इस तरह से ब्लड बैंक में लोगों ने अपना दर्ज करा दिया है लेकिन जरूरत पड़ने पर रक्तदाता मुकर रहे हैं।