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खेल और स्काउट शुल्क के लाखों रुपये दबाए बैठे हैं स्कूल संचालक

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एटा। छात्र-छात्राओं से खेल और स्काउट शुल्क वसूल रहे विद्यालय जिला अंश जमा नहीं कर रहे। वित्तविहीन संस्थाएं ही नहीं राजकीय एवं एडिड विद्यालय भी मनमानी में पीछे नहीं हैं। गत शिक्षा सत्र की 276 डिफाल्टर संस्थाओं में दो एडिड एवं तीन राजकीय विद्यालय शामिल हैं।


जिले के पौने तीन सौ से अधिक माध्यमिक विद्यालय लाखों रुपए का खेल-स्काउट शुल्क दबाए बैठे हैं। छात्रों से लिया गया शुल्क जेब में रखे हैं। जिला कोष में धनाभाव के चलते वार्षिक आयोजनों के लिए पैसे का टोटा है। शनिवार को संपन्न प्रधानाचार्यों की बैठक में खेल समिति के कोषाध्यक्ष डॉ सुधीर गुप्ता ने बताया कि गत शिक्षा सत्र में जिले के 298 विद्यालयों ने 53965 विद्यार्थियों का पांच लाख 39 हजार 650 रुपए का खेल अंश जमा किया है। जबकि जिले में संचालित 574 विद्यालयों में खेल शुल्क देने वाले छात्र-छात्राओं की संख्या डेढ़ लाख के करीब है। बताते चलें कि जिला अंश में दस रुपए प्रति छात्र की दर निर्धारित है।
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पौने चार लाख जमा हुआ
स्काउट गाइड के कोषाध्यक्ष और सेवानिवृत प्रधानाचार्य रनवीर सिंह यादव ने बताया कि जिला अंश में गत सत्र में मात्र 53965 छात्रों के तीन लाख 74 हजार 368 रुपए जमा हुए हैं।
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शुल्क जमा करने पर जोर
प्रधानाचार्य परिषद के मंडलीय अध्यक्ष अभिलाख सिंह यादव ने कहा कि स्पष्ट आदेश के अभाव में वित्तविहीन संस्थाएं उदासीनता दिखा रहीं हैं। लेकिन इस बार जिले के सभी विद्यालय शुल्क जमा करेंगे। सह जिला विद्यालय निरीक्षक केएस वर्मा ने कहा कि अच्छे आयोजनों के लिए धन की जरूरत होती है। ऐसे में सभी को शुल्क जमा करना चाहिए। जिला विद्यालय निरीक्षक निरंजन देव ने विद्यालयों की उदासीनता पर नाराजगी जताते हुए डिफाल्टर संस्थाओं को अविलंब शुल्क जमा कराने के निर्देश दिए हैं। आश्वासन दिया कि खेल आयोजनों के लिए धन की कमी नहीं होने दी जाएगी।
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