एटा। सिंचाई विभाग की ड्रेनेज शाखा यूं तो नाम के लिए जिले में है, लेकिन उसके पास काम नहीं है। यदि काम आता भी है तो उसको पूरा कराने के लिए पर्याप्त कर्मचारियों के अभाव में पूर्ण नहीं हो पाता हैं। ड्रेनेज खंड का अस्तित्व अब खतरे में है। ऐसे में यहां पर कोई कर्मचारी अपनी पोस्टिंग नहीं कराना चाहता है।
सिंचाई विभाग में कुछ अधिकारी और कर्मचारियों का समूह बनाकर ड्रेनेज खंड की स्थापना की गई थी। यह विभाग जिले स्तर पर बनाया गया और इसके जिम्मे ऊसर और खेतों में पानी की नालियों का निर्माण, सिल्ट सफाई और पुलियों का निर्माण आदि था। एटा ड्रेनेज खंड की हालत खस्ता हो चुकी है। हालांकि विभाग के पास अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए बहुत बड़े भू-भाग पर आवासीय परिसर बनाया गया है, जो वर्तमान में खंडहर होता जा रहा है।
एक अधिशासी अभियंता हैं जो जिले को पूरा समय नहीं दे पाते हैं। वहीं विभाग में तैनात एक जूनियर इंजीनियर की 2017 में हत्या हो चुकी है तो एक अन्य की पोस्टिंग होने पर वह स्थानान्तरण कराकर चले गए। विभाग में कुल 22 पद सृजित हैं। हालांकि यहां एक अधिशासी अभियंता, एक अवर अभियंता और चार बाबुओं के अलावा चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी ही तैनात हैं।
अधिशासी अभियंता प्रेमशंकर सिंह ने बताया है कि वित्तीय वर्ष में एक कार्य प्रस्तावित था। वह 15 लाख की लागत से पूर्ण कराया गया। इसके अतिरिक्त विभाग ने पूरी साल कोई कार्य नहीं किया। ड्रेनेज खंड एटा के अंतर्गत कासगंज आता है। कासगंज के पटियाली क्षेत्र के गांव पिथनपुर में 3.03 किमी के नाले का निर्माण कार्य किया गया है।
शासन से आए बजट की मोटी रकम 65 लाख रुपये कर्मचारियों के अभाव में शासन को वापस कर दी गई। इसके तहत सीसीएल पुनर्द्धार और सिल्ट सफाई के कार्य होने थे। अधिशासी अभियंता का कहना है कि विभाग का अस्तित्व पूरी तरह से खतरे में है। उम्मीद है कि सिंचाई विभाग में ड्रेनेज खंड को विलय कर दिया जाएगा। ऐसे में कर्मचारी विभाग में पोस्टिंग भी नहीं करा रहा है। अपर्याप्त कर्मचारियों से ही विभाग को चलाने की कोशिश की जा रही है। शासन और जिला प्रशासन को कर्मचारियों के अभाव की लिखित में कई बार अवगत कराया जा चुका है।