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दिवाली नर गणपति-लक्ष्मी की मूर्ति पर छाई महंगाई

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गणेश
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एटा।
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दिवाली के त्योहार पर पूजन के लिए गणपति-लक्ष्मी की मूर्तियां बाजार में आ चुकी हैं। मूर्तियों पर महंगाई का असर साफ नजर आ रहा है। वहीं दियों और कुलुआ की बिक्री भी जमकर हो रही है। चाइना उत्पादों का बहिष्कार होने से कुंभकारों के चेहरे खिले हुए हैं। बाजार में पीओपी की मूर्तियों की खासी मांग है।
मूर्ति का सेट 30 से 250 रुपये तक बिक रहा है। छोटे गणपति-लक्ष्मी की मूर्तियों की कीमत जहां 30 रुपये है। वहीं डिजाइनर मूर्तियां 100 रुपये से ऊपर हैं। कुंभकारों का कहना है कि कारीगर और मिट्टी के दाम बढ़ जाने से मूर्तियाें की कीमतों में इजाफा हुआ है। इसके साथ ही पीओपी की मूर्तियों की खासी मांग है।
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घी के दीयों की परंपरा को कायम रखने के लिए कई दीपक बाजार में हैं। जिसमें डिजाइनर दियों की खासी मांग है। इनकी कीमत 20 रुपये दर्जन से 50 रुपये तक है। कुंभकार चाइना उत्पादों के बहिष्कार को लेकर खुश हैं। इस बार मार्केट में देशी मिट्टी की महक है। कुंभकार उमेश कहते हैं कि मूर्तियों पर महंगाई है। लागत बढ़ने से दाम बढ़ गए हैं। दीयों और कुलुआ की भी खासी मांग है।
धनतेरस को लेकर सज गया बाजार
अलीगंज। धनतेरस पर्व को लेकर बाजारों में रौनक दिखने लगी है। पर्व में सिर्फ दो दिन का समय है। बर्तन व्यवसायियों ने तैयारी पूरी कर ली है। ग्राहकों को लुभाने के लिए दुकानों की साजो सजावट की तैयारियां चल रही हैं। दुकानदारों ने स्टील तांबा सिल्वर पीतल के बर्तनों का स्टॉक कर लिया है। व्यवसायियों ने कम मूल्य के छोटे बर्तनों का अधिक स्टॉक किया है। क्योंकि दुकानदारों को उम्मीद है कि परम्परा निभाने को लोग औपचारिकता बतौर छोटे बर्तनों की खरीदारी करेंगे। घर की साजो सज्जा में प्रयोग होने वाले सामानों की बिक्री तेज हो गई है। घर की सजावट के लिए लोग आकर्षक सीनरी और बनावटी फूलों से निर्मित मालाएं आदि खरीद रहे हैं। रंगबिरंगी झालरों की मांग अधिक होने के कारण इलेक्ट्रॉनिक चीजों और झालरों की खरीदारी भी काफी शुरू हो गई है।

दिवाली पर बिक्री न होने से व्यापारी परेशान
कासगंज। दिवाली पर्व पर लाभ कमाने के लिए तरह तरह के सामान सजाकर बैठे लोग व्यापारी ग्राहक न आने से मायूस हैं। दुकानदारों का कहना है कि आसमान छू रही महंगाई ने लोगों को परेशान कर दिया है।
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दिवाली पर्व में तीन दिन का समय ही शेष रह गया है। पर्व के नजदीक आ जाने के साथ बाजार में खील खिलौने, मूर्तियां, कलेंडर, बिजली की झालर, सजावट का सामान, दीपक के फड़ सज चुके हैं, लेकिन इन पर अभी ग्राहक नहीं पहुंच रहे हैं। फसल न होने से किसान परेशान हैं। किसान राजा राम का कहना है कि फसल का जो मूल्य बाजार में मिल रहा है। उससे उसकी लागत भी नहीं मिल पा रही। ऐसे में वे कैसे त्योहार का सामान खरीदें। ग्रामीण सफाई कर्मचारी संघ के महामंत्री सुरेंद्र सिंह का बताया कि सितंबर माह का वेतन नहीं मिला है। एरियर बकाया चल रहे हैं। कारोबारी अनिल माहेश्वरी का कहना है कि कीमतों पर महंगाई का असर तो नहीं है, लेकिन ग्राहक बाजार में नहीं आ रहे। किसान परेशान है जिससे वह खरीदारी करने नहीं पहुंच रहा।
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