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58 साल पुराना है अनंत रथयात्रा का इतिहास

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58 साल पुराना है अनंत रथयात्रा का इतिहास - फोटो : अमघ्‍ उजाला
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एटा।
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अनंत चतुुर्दशी का जिले में विशेष महत्व रहा है। 58 साल पहले की गई शुरुआत अब सामाजिक एकजुटता और अखंडता का पर्याय बन चुकी है। अनंत भगवान सज धजकर हर साल अनंत चतुर्दशी पर भक्तों को आशीष देने निकलते हैं। जिले में अनंत चतुर्दशी पर निकलने वाली रथयात्रा को शहर की शान माना जाता है। जिले भर के दूर दराज से लोग रथयात्रा में भाग लेने के लिए पहुंचते हैं।
मंगलवार को अनंत चतुर्दशी के मौके पर एक बार फिर अनंत भगवान रथ पर सवार होकर शहर में भ्रमण को निकलेंगे। उल्लासित भक्त जयकारे लगाते हुए भक्ति में सराबोर होंगे। शहर में रथयात्रा को लेकर माहौर समाज के लोगों ने तैयारियां शुरू कर दी हैं। विशाल रथ को सजाने का काम चल रहा है। माहौर वैश्य मेला कमेटी के मंत्री विवेक गुप्ता बताते हैं कि 58 साल पहले रथयात्रा की शुरुआत समाज के वृद्ध लोगों ने की थी। इससे पहले अनंत चतुर्दशी को पुरानी बस्ती स्थित मंदिर में ही मनाया जाता था। सामाजिक एकजुटता को बढ़ाने के लिए वृद्धों की सोच से रथ यात्रा शुरू की गई। पहले तो रथयात्रा आसपास के मोहल्लों का ही भ्रमण करके समाप्त हो जाती थी। इसके साथ ही अनंत चतुर्दशी का मेला देखने के लिए बाहर के जनपद के लोग भी शामिल होते हैं। उन्होंने बताया कि रथ यात्रा के जरिये भक्त अनंत भगवान के दर्शन के साथ आपसी सौहार्द को बढ़ाते हैं।
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हर घर जाते हैं अनंत महाराज
अनंत महाराज की रथयात्रा शहर के माहौर वैश्य समाज के हर व्यक्ति के घर के आगे से गुजरती है। ऐसा माना जाता है कि अनंत भगवान साल में एक बार अनंत चतुर्दशी पर भक्तों के दुखड़े दूर करने आते हैं। यात्रा के स्वागत को श्रद्धालु भी लालायित रहते हैं।
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हाथ से खींचा जाता है रथ
रथयात्रा में समाज के युवाओें की अहम भूमिका होती है। अनंत भगवान के रथ में बैल या घोड़े नहीं, बल्कि समाज के युवा रथ को हाथ से खींच कर महाराज को नगर भ्रमण कराते हैं।
अवागढ़ में भी होता है आयोजन
अनंत चतुर्दशी के मौके पर अवागढ़ में रथयात्रा का आयोजन किया जाएगा। कस्बा के मोहल्ला तिवारियान स्थित मंदिर से रथयात्रा निकाली जाएगी।
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