आगरा। शासन ने प्राइवेट प्रैक्टिस करने वाले सरकारी डाक्टरों की सूची बनाने का जो आदेश दिया है, उस पर लोकल इंटेलीजेंस यूनिट ने काम तेज कर दिया है। अभी तक दस डाक्टरों के नाम सूची में आ चुके हैं। इनमें एसएन मेडिकल कॉलेज के सात और जिला अस्पताल के तीन डाक्टर शामिल हैं। ये सभी डाक्टर प्राइवेट हॉस्पिटलों में प्रैक्टिस करने के लिए जाते हैं। एलआईयू ने इन सभी हॉस्पिटलों की सूची भी तैयार कर ली है।
पहली सूची में सिर्फ वे ही डाक्टर रखे गए हैं जो प्राइवेट हॉस्पिटल में प्रैक्टिस कर रहे हैं। दूसरी सूची में उन्हें शामिल किया जाएगा जिन्होंने अपने क्लीनिक खोल रखे हैं। एलआईयू के सूत्रों ने बताया कि जिन डाक्टरों के परिवार में से किसी ने अपना क्लीनिक खोल रखा है, उन्हें इस सूची में शामिल किया जाना मुश्किल है। कारण यह है कि साक्ष्य नहीं मिल पाएगा। वह आसानी से यह कहकर बच जाएंगे कि क्लीनिक उनके परिवारीजन का है, उनका नहीं। ऐसे डाक्टरों की संख्या 20 से ज्यादा है। इनमें एसएन की प्रोफेसर भी शामिल हैं। जिला अस्पताल के भी कई डाक्टर हैं।
दूसरा, वे डाक्टर भी चिह्नित नहीं किए जा रहे हैं जो सरकारी अस्पताल में संविदा पर काम कर रहे हैं। इनके प्राइवेट प्रैक्टिस करने पर पाबंदी नहीं है। एसएन के जिन सात डाक्टरों का नाम है, उनमें से एक वीआरएस के लिए भी आवेदन कर चुका है। यह सूची शासन को भेजी जाएगी। वहीं से इस पर कार्रवाई का निर्णय लिया जाएगा। हालांकि आदेश तो यह है कि ऐसे डाक्टरों पर एफआईआर दर्ज कराई जाए।
सूची पूरी तरह से गोपनीय है। इस बारे में कुछ भी नहीं बताया जा सकता है। प्राइवेट प्रैक्टिस करने वाले सरकारी डाक्टरों की सूची बनाने का आदेश शासन ने दिया है। इस पर काम चल रहा है।
- विजय कपिल, सीओ एलआईयू