मैनपुरी। जिला अस्पताल की लापरवाही का एक कारनामा सोमवार की सुबह सामने आया। अस्पताल की इमरजेंसी में यदि रविवार की रात घायल मजदूर को भर्ती कर लिया जाता तो शायद उसकी जान बच सकती थी।
मजदूर स्वयं भर्ती होने आया था, लेकिन रात मेें तैनात स्टाफ ने उसे भर्ती न कर दर्द का इंजेक्शन देकर टरका दिया। सुबह जब ड्यूटी बदली तो दूसरे डॉक्टर की नजर बाथरूम में पड़े मजदूर सत्यपाल पर पड़ी। इसके बाद उन्होंने उसे भर्ती कर उपचार शुरू किया। उपचार के दौरान 15 मिनट बाद ही सत्यपाल की खून की उल्टी हुई और उसकी मौत हो गई।
फिरोजाबाद के थाना मटसैना के गांव गनेशपुर खेड़ा निवासी सत्यपाल (30) भट्टा मजदूर था। वह फिरोजाबाद से मैनपुरी बेचे जाने के लिए आने वाली ईंट ट्राली के साथ मैनपुरी आया करता था।
पिछले कई महीनों से उसने गांव भोजपुरा में ही रहना शुरू कर दिया था। रविवार की रात सत्यपाल जिला अस्पताल की इमरजेंसी में उपचार के लिए आया। डाक्टरों के पूछने पर उसके बताया कि उसकी किसी से लड़ाई के चलते चोटें आईं हैं। इसके चलते उसके पेट व शरीर में दर्द हो रहा है। इस तैनात स्टाफ ने उसको दर्द का इंजेक्शन देकर घर जाने को कहा। इस दौरान वह लघुशंका के लिए इमरजेंसी में बने बाथरूम में चला गया।
हालत ज्यादा बिगड़ने के चलते वह रातभर पड़ा रहा। पूरी रात बाथरूम में पड़े सत्यपाल पर किसी भी स्टाफ की नजर नहीं गई। यह खुलासा तब हुआ जब ड्यूटी बदलने के बाद डॉ. आरके सिंह अस्पताल में आए। उसकी नजर सत्यपाल पर पड़ी। उन्होंने सत्यपाल को उठाया और पूरे मामले की जानकारी ली। साथ ही भर्ती कर उपचार देना शुरू कर दिया। साथ ही उससे उसका घर का पता व नंबर भी पूछा। इसी दौरान सोमवार की सुबह 8:05 बजे सत्यपाल को एक खून की उल्टी हुई और इसी के साथ उसकी मौत हो गई।
इसके बाद डाक्टर आरके सिंह ने पुलिस को सूचना दी। पुलिस ने सत्यपाल द्वारा डाक्टर को बताए मोबाइल पर परिवारीजनों को सूचना दी। इसके बाद शव का पंचनामा भर कर पोस्टमार्टम कराया और शव परिवारीजनों को सौंप दिया।
घरवालों का कहना था कि वह शादीशुदा था। विवाद के बाद पत्नी मायके में रह रही है।
सत्यपाल मैनपुरी में रह रहा था। साथ ही वह शराब पीने का भी आदि था। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में शरीर के अंदरूनी हिस्सों में फ्रेक्चर बताया गया है। कोतवाली पुलिस का कहना है कि अभी तक परिवारीजनों की ओर से थाने में कोई तहरीर नहीं दी गई है। तहरीर मिलने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
सत्यपाल की मौत होने के बाद डॉ. आरके सिंह ने सीएमएस डॉ. एके उपाध्याय को पूरे मामले की जानकारी दी। साथ ही उक्त लापरवाही की जांच कराने की मांग की।
सीएमएस ने जिला अस्पताल में तैनात डाक्टर पीके दुबे को उक्त मामले का जांच अधिकारी नियुक्त किया। सीएमएस का कहना है कि जांच के बाद जो भी स्टाफ दोषी पाया जाएगा उसके खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाएगी।