एटा। दवा, डाक्टर और दुआओं पर जिंदगी कट रही थी। अस्पताल उनके लिए आसरा बने थे। लगता ही नहीं था कि जिंदगी चल भी पाएगी या नहीं। ऐसी गंभीर बीमारियां थीं, कि एम्स के डाक्टर तक हाथ खड़े कर चुके थे, लेकिन योग ने उनमें जिंदगी जीने की उम्मीद पैदा की। योग का दामन थामते ही परेशानियां दूर हो गईं। जी हां जिले में योग ने सैकड़ों लोगाें में जिंदगी जीने की आशा पैदा की। योग ने उनको निरोगी बनाया और जीने का मकसद दिया। आज अंतरराष्ट्रीय योग दिवस है। आइए नजर डालते हैं कुछ ऐसे ही निरोगियों पर ....।
शहर के पुरानी स्टेट बैंक कंपाउंड निवासी 68 वर्षीय ज्योतिषाचार्य अशोक वेद को आठ साल पहले किडनी में संक्रमण की समस्या हुई। परिवारीजनों ने दिल्ली के गंगाराम अस्पताल, एम्स समेत तमाम बड़े अस्पतालों में इलाज कराया, लेकिन बीमारी दूर नहीं हो सकी। इसके बाद उन्होंने योग का सहारा लिया। पतंजलि से जुड़कर कपाल भाति और अनुलोम विलोम जैसे आसन किए। कुछ महीनों मेें फायदा नजर आने लगा।
भगीपुर निवासी 58 वर्षीय रामचंद्र सिंह शाक्य को पिछले साल पैरालाइसिस का अटैक पड़ा। शरीर के बाएं धड़ ने काम करना बंद कर दिया। परिवारीजनों ने डाक्टरों के चक्कर काटे। मगर शरीर ने साथ नहीं दिया। पतंजलि चिकित्सालय में पहुंचे और दवा लेकर योग शुरू किया। प्रशिक्षकाें द्वारा बताए गए आसन शुरू किए। उनको चार महीने में आराम मिला। अब वे बिना सहारे के आराम से चलते हैं।
गली धानमील निवासी 57 वर्षीय सरिता अग्रवाल को छह साल पहले पीठ में दर्द उठा। परिवारीजनोें ने गंगाराम, मेदांता सरीखे अस्पतालों में दिखाया। डाक्टरों ने आपरेशन के लिए कह दिया। आपरेशन की बात भी फाइनल हो गई, लेकिन डाक्टर भी आपरेशन को लेकर संतुष्ट नहीं थे। दर्द की दवा लेकर सरिता लौट आईं। एटा आकर उन्होंने योग का सहारा लिया। वज्रासन, पद्मपादासन, भृत्सिका जैसे योग करना शुरू किए और अब वे आराम से चल फिर पाती हैं।
तमाम लोगों को हुआ फायदा
पतंजलि सेवा समिति की महिला प्रभारी डा. श्याम लता वेद कहती हैं कि जिले में योग ने कई लोगाें को फायदा पहुंचाया है। योग ने सचमुच लोगों को निरोग बनाकर सही दिशा दी है। सबको योग करना चाहिए।