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फेल पुलों का खेल: पीडब्ल्यूडी ने पीपे के पुलों पर ढाई करोड़ फूंके, सरकारी धन का यूं हो रहा बंदरबांट

Thu, 21 May 2026 10:02 AM IST
Dhirendra Singh अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा

सार

आगरा में पीडब्ल्यूडी द्वारा चंबल और यमुना घाटों पर अस्थायी पीपे के पुलों के निर्माण और हटाने में हर साल करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं। ग्रामीणों की मांग है कि इस दोहराए जाने वाले खर्च की जगह स्थायी पुल बनाए जाएं ताकि आवागमन की समस्या खत्म हो सके।
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पोइया घाट स्थित पांटून पुल - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
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पीपों के फेल पुलों का खेल देखिए। दो साल में लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) ने कैंजरा घाट, बटेश्वर और पिनाहट में पांटून पुल बनाने, हटाने और संचालन के नाम पर चंबल और यमुना के पानी पर ढाई करोड़ की मलाई जमाई। हर साल पीपों के पुल बनाने और हटाने के नाम पर इंजीनियर और ठेकेदारों पर सरकारी धन के बंदरबांट के आरोप हैं।
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दयालबाग स्थित पोइया घाट पर पीडब्ल्यूडी का पांटून पुल एक महीने में फेल हो गया। 75 लाख रुपये इस पुल पर खर्च किए जाने के बाद अब यहां 125 करोड़ रुपये से पक्का पुल बनाने के लिए सर्वे हो रहा है। नदियों के दोनों किनारों पर रहने वाले सैकड़ों ग्रामवासियों की आजीविका बरसात में पुल नहीं होने के कारण प्रभावित हो जाती है। यही कारण है कि पांटून पुल बनाए जाते हैं। पीडब्ल्यूडी के आंकड़े बताते हैं कि हर साल कैंजरा घाट, बटेश्वर और पिनाहट में पीपे के पुल (पॉन्टून ब्रिज) बनाने और उन्हें डिस्मेंटल करने के नाम पर ढाई करोड़ रुपये से अधिक बजट विसर्जित हो गया।

दस्तावेजों में हर साल ये काम पुल निर्माण 100% पूर्ण दिखाए, लेकिन मानसून की पहली बारिश के साथ ही ये करोड़ों रुपये नदी में बह गए और ग्रामीण फिर से नावों के भरोसे रह गए। जन प्रहरी संस्था के संयोजक नरोत्तम शर्मा का कहना है कि आखिर विभाग इन घाटों पर स्थायी पुल बनाकर जनता का पैसा और समय क्यों नहीं बचाना चाहता। क्या यह हर साल बनाओ, हर साल हटाओ की प्रक्रिया कुछ खास ठेकेदारों और अधिकारियों की तिजोरियां भरने का जरिया बन गई हैं। उन्होंने मांग उठाई कि पांटून पुलों की जगह जहां जरूरत है, वहां आवागमन के लिए स्थायी पुल तैयार किए जाएं।

पीडब्ल्यूडी फाइलों से खुला खर्च का कच्चा चिट्ठा
पीडब्ल्यूडी के दस्तावेजों से पता चलता है कि एक ही स्थान पर पुल बनाने, उसे हटाने और उसके संचालन के नाम पर हर साल लाखों रुपये खर्च किए जा रहे हैं। वित्तीय वर्ष 2024-25 में कैंजरा घाट एवं अद्योतगढ़ चंबल पर पीपे के पुल का निर्माण, मरम्मत एवं संचालन में 39.38 लाख रुपये खर्च किए। बटेश्वर एवं कल्याणपुर यमुना पर पीपे के पुल का निर्माण, मरम्मत एवं संचालन में ₹31.19 लाख रुपए बहाए। पिनाहट घाट चंबल पर पीपे के पुल लगाने और हटाने पर ₹34.10 लाख खर्च हुए। इसके अतिरिक्त संचालन शुल्क पर इन तीनों घाटों पर क्रमशः ₹19.43 लाख, ₹16.93 लाख और ₹23.10 लाख रुपये बहाए गए। पीडब्ल्यूडी के आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2023-24 में भी लगभग उतनी ही राशि इन्हीं कामों के लिए खर्च की गई थी। पिनाहट घाट 2023-24 में पुल लगाने/हटाने पर ₹22.89 लाख खर्च हुए। कैंजरा घाट पर ₹36.02 लाख और बटेश्वर घाट 2023-24 पुल लगाने/हटाने पर ₹31.26 लाख खर्च हुए।
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दस साल के खेल में बन जाता पक्का पुल
आंकड़ों के अनुसार, पिछले 10 वर्षों में इन अस्थायी पुलों को लगाने, हटाने और चलाने पर खर्च की गई कुल राशि एक स्थायी कंक्रीट पुल की लागत के करीब पहुंच रही है। मानसून के दौरान जब ये पुल हटा लिए जाते हैं, तो इन क्षेत्रों का संपर्क पूरी तरह कट जाता है। स्वास्थ्य और शिक्षा व्यवस्था ठप हो जाती है, लेकिन सरकारी फाइलों में इस मानवीय संकट का कहीं कोई जिक्र नहीं है।
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