मैनपुरी। सांसद का ताज हासिल करने के लिए चुनावी रण में 12 प्रत्याशी ताल ठोंक रहे हैं। दो चेहरों को छोड़कर दस प्रत्याशियों से वोटर अनजान हैं। वोटर इन चेहरों को न जानते हैं और न ही पहचानते हैं। नामांकन के बाद से ये प्रत्याशी नजर भी नहीं आ रहे हैं। अमर उजाला की पड़ताल में 12 प्रत्याशियों की सूची में सिर्फ दो चेहरों को मतदाता पहचान सके। शेष 10 चेहरों पर उनका कहना था कि वह उन्हें नहीं जानते हैं, न ही वह उनके क्षेत्र में प्रचार के लिए आए हैं।
मिलकिया चौराहा (आलीपुर खेड़ा) पर कुछ लोग दुकान के पास खड़े चुनावी चर्चा कर रहे थे। हमने उन्हें प्रत्याशियों की सूची दिखाई। यहां मौजूद बीस से अधिक लोग सिर्फ सपा और भाजपा प्रत्याशी को ही पहचान सके। इस दौरान आछेलाल वर्मा ने कहा कि इन्हें कौन नहीं जानता, ये तो नेता जी हैं, दूसरे भाजपा के प्रत्याशी हैं। इसके अलावा वे अन्य किसी प्रत्याशी को नहीं पहचान सके। हजूर अली भी दो प्रत्याशियों को ही पहचान सके। दीपक राजपूत, संतोष राजपूत, डॉक्टर सुनील, डॉक्टर तालेराम, नीतू प्रजापति, राहुल जाटव, राहुल यादव, अंशुमन आदि सिर्फ दो प्रत्याशियों को पहचान सके।
गल्ला मंडी में मौजूद व्यापारी और किसान 12 प्रत्याशियों में भाजपा और सपा के प्रत्याशी को ही पहचान सके। ग्रामीण बोले, इस बार कोई प्रचार करने आ नहीं रहा है, कैसे पहचाने कि कौन चुनाव लड़ रहा है। इसी बीच भूप सिंह बोले वोटर्स इंटरनेशनल पार्टी के प्रत्याशी को पहचान लिया, बोले ये हमारे यहां से विधायक रह चुके हैं। इसके आगे वह भी किसी की पहचान नहीं कर पाए। यहां महेश सिंह, राजेंद्र पाल, अशोक बाबू, जय देव सिंह, रामरतन यादव, प्रमोद सक्सेना, बबलू दीक्षित, अहिवरन प्रजापति, राजेंद्र सिंह, राकेश कुमार मौजूद रहे।
गांव असैंधी (किशनी) में भी मतदाता सिर्फ दो प्रत्याशियों को ही पहचान सके। नत्थू सिंह ने कहा कि नेता जी को तो सब जानते हैं। भाजपा प्रत्याशी पिछली बार भी चुनाव लड़ चुके हैं। इस कारण उन्हें भी लोग जानते हैं। देवनारायण ने कहा कि दो प्रत्याशियों के अलावा वह किसी को नहीं जानते हैं, क्योंकि अभी तक कोई वोट मांगने नहीं आया। सुनील सिंह, अनुराग चौहान, सौरभ चौहान, महेंद्र सिंह, चंदन, करन, राजू भी दो से अधिक प्रत्याशियों को नहीं पहचान सके।
गांव जटपुरा (किशनी) में चुनावी चर्चाएं जोरों से चल रही थीं। कैमरा देखकर लोग चुप्पी साध गए। वह कुछ पूछते इससे पहले ही रिपोर्टर ने प्रत्याशियों की सूची ग्रामीणों के सामने रख दी। बृजपाल भदौरिया, हम्मीर सिंह, महेशचंद्र गुप्ता सिर्फ दो प्रत्याशियों को ही पहचान सके। सुलेमान ने कहा कि इस बार तो कोई वोट मांगने आ नहीं रहा है। ऐसे में कैसे पता चले कौन चुनाव लड़ रहा है। विनय कुमार ने कहा कि जब प्रत्याशी ग्रामीणों के बीच नहीं आएगा तो वह उसे कैसे पहचानेंगे। प्रमोद कुमार ने भी दिमाग पर जोर दिया और फिर सिर हिला दिया। दो प्रत्याशियों को ही वह पहचानते हैं।