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विवरण सही न होने से किसानों का 18.62 करोड़ का भुगतान लटका

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मिल ने बेची 15 हजार क्विंटल चीनी - फोटो : अमर उजाला
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कासगंज। न्यौली चीनी मिल में लापरवाही चरम सीमा पर है। मिल द्वारा किसानों का बैंक विवरण व्यवस्थित ढंग से उपलब्ध नहीं कराने पर 18.62 करोड़ रुपये का भुगतान लटका हुआ है। गन्ना किसान भुगतान की आस में बैंकों के चक्कर लगा रहे हैं लेकिन मिल पूर्ण बैंक विवरण उपलब्ध नहीं करा पा रही है।
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न्यौली चीनी मिल पर गन्ना किसानों का 37 करोड़ रुपये का भुगतान बकाया था। भुगतान के लिए प्रदेश सरकार ने सॉफ्ट लोन के तहत 34.62 करोड़ रुपये की धनराशि स्वीकृत की। धनराशि स्टेट बैंक न्यौली की शाखा में भेजी गई, जिससे किसानों के खातों में सीधा भुगतान भेजा जा सके। बैंक ने चीनी मिल से किसानों के बैंक खातों का विवरण मांगा। न्यौली चीनी मिल ने खातों के विवरण में भी गंभीरता नहीं दिखाई। अपूर्ण विवरण बैंक को उपलब्ध कराया गया है। इससे किसानों के खातों में धनराशि नहीं पहुंच रही है। 34.62 करोड़ के सापेक्ष मात्र 16 करोड़ रुपये का भुगतान किसानों के खातों में भेजा गया है। महज स्टेट बैंक के खाताधारक किसानों को गन्ने के बकाये का भुगतान मिला है। इसके अलावा अन्य बैंकों के खाताधारक किसान दर-दर भटक रहे हैं। मिल प्रशासन किसानों की समस्या की ओर ध्यान नहीं दे रहा है। लगभग 700 किसानों को गन्ने के बकाये के भुगतान की दरकार है।

- एसबीआई शाखा को मिल ने लगभग 1500 किसानों के खातों का विवरण उपलब्ध कराया है। हो सकता है कोई विवरण अपूर्ण रह गया हो। बैंक अधिकारियों से बात कर जल्द किसानों के खातों में धनराशि भिजवाएंगे।
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रामआसरे यादव, डिप्टी डायरेक्टर, न्यौली मिल।
- जो किसान एसबीआई के खाताधारक थे, उनके खातों में लगभग 16 करोड़ रुपये का भुगतान भेज दिया गया है। अन्य बैंकों का विवरण मिल द्वारा गलत उपलब्ध कराया गया है। खाता संख्या गलत हैं। ऐसे में धनराशि नहीं भेजी जा सकती है।
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सीएस कक्कड़, बैंक प्रबंधक, एसबीआई न्यौली शाखा।
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