बरसाना (मथुरा)। मयूर जैसे नीले रंगों से सुशोभित वस्त्र धारण करना, नित्य प्रति राधा की चंदन-अलता सेवा में लीन, कुछ ऐसी ही आदतें शुमार थीं राधा की प्रधान सखियों में से एक विशाखा सखी की। गांव कमई में विशाखा सखी का जन्म भाद्रपद शुक्लपक्ष नवमी यानि 18 सितंबर को मनाया जाएगा।
बरसाना से पूर्व दिशा में छह किलोमीटर दूर गांव कमई स्थित है। गांव में घुसते ही मंदिर गांव की शोभा को प्रदर्शित करता दिखाई पड़ता है। यहां कुंजों के मध्य भाग में विशाखा सखी प्रिया-प्रियतम के साथ विराजमान होकर भक्तों पर कृपा बरसाती दिखाई पड़ती हैं। विस्तृत जानकारी श्रीलनारायण भट्ट कृत ब्रजोत्सव चंद्रिका के अंतर्गत विविध शास्त्रीय प्रमाणों पर आधारित मिलता है।
कई आचार्यवृदों के अनुसार विशाखा सखी का जन्म अष्टमी को भी बताया गया है, जबकि शास्त्रों में इनके विवाह का वर्णन प्रेम सरोवर गाजीपुर में संपन्न होना अंकित है। मंदिर के महंत सूरजदास महाराज ने बताया कि दूध, दही, शहद, घृत, गंगाजल आदि से मंत्रोच्चारण के मध्य विधिपूर्वक विशाखा सखी का अभिषेक किया जाएगा।
श्रीजी से एक दिन छोटी हैं विशाखा
विशाखा सखी ब्रजोत्सव चंद्रिका के अनुसार विशाखा राधारानी से एक दिन छोटी हैं। शास्त्रों के अनुसार तो यह राधारानी से महज कुछ घंटे ही छोटी हैं। विशाखा सखी के पिता सुभानु और माता का नाम देवदानी था।
शास्त्रों और वर्तमान सेवायतों में मतभेद
यदि शास्त्रोक्त प्रमाण देखें तो विशाखा सखी का गांव आजनौक बताया जाता है, जबकि कमई गांव में बने मंदिर के सेवायत विशाखा का जन्म गांव कमई में ही होना मानते हैं।