स्टोर में ट्रांसफार्मर की मरम्मत करते कर्मचारी
एटा। शासन के अलर्ट के बाद जिले में बिजली चोरी पर ही नहीं वरन उपकरण हानि पर भी अंकुश लगा है। गत वर्ष की तुलना में ही अप्रैल, मई व जून के तीन महीनों में साठ लाख से अधिक का ट्रांसफार्मर डैमेज रुका है। वहीं इस दौरान उपकरण चोरी भी शून्य रही।
लाइन लॉस, उपकरण चोरी एवं ट्रांसफार्मर डैमेज पर अंकुश लगा है। 90 प्रतिशत से अधिक संयोजनों पर मीटर लगने से बिलिंग हेराफेरी रुकी है। एरियल बंच केबल ने कटिया चोरी पर भी लगाम लगाई है। ऐसे में 40 प्रतिशत का लाइन लॉस गिरकर 25 तक आ गया है। चेकिंग के डर से लोग बिजली चोरी से बाज आए हैं। डिस्कनेक्शन के डर से राजस्व भुगतान भी बढ़ा है। उपकरण चोरी व ट्रांसफार्मर डैमेज रुकने से विभाग को वर्ष में करोड़ों का फायदा हुआ है। अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि गत वर्ष की तुलना में इस साल अप्रैल, मई व जून माह में 234 ट्रांसफार्मर कम फुंके हैं। ऐसे में इनकी मरम्मत पर खर्च होने वाले 60 लाख रुपये से अधिक की बचत हुई है। इतना ही नहीं इस वर्ष कोई भी ट्रांसफार्मर व तेल चोरी की घटना भी नहीं हुई है। बताते चलें कि जिले में के तीनों खंडों में एक लाख दस हजार से अधिक विद्युत उपभोक्ता एवं 14623 ट्रांसफार्मर हैं।
माह वर्ष 2017 में फुंके ट्रांसफार्मर वर्ष 2018 में फुंके ट्रांसफार्मर
अप्रैल 328 212
मई 286 261
जून 349 256
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963 729
फुंके ट्रांसफार्मर की मरम्मत पर डैमेज एवं क्षमता के अनुसार खर्च होता है। विभिन्न क्षमताओं के ट्रांसफार्मर पर 20 से पचास हजार रुपये का खर्च आता है।
सोपाली सिंह, अधिशासी अभियंता, ग्रामीण खंड प्रथम