आर्थिक तंगी से परेशान शिक्षामित्र ने फांसी लगाकर दी जान
- फोटो : अमर उजाला
एटा। जिंदा रहने पर स्कूल में बच्चों को अच्छी शिक्षा देने वाला शिक्षामित्र मनमोहन मरने के बाद भी अपने बेटा-बेटी को जिंदगी का फलसफां सिखा गया। सुसाइड नोट में पत्नी का ख्याल रखने की बच्चों को सीख देते हुए मेहनत से पढ़ाई करने की बात लिखी है।
सुसाइड नोट में मनमोहन ने लिखा, अंशुल, लालू मैं तुम्हे अब न परेशान करूंगा और न ही तुमसे मिलने तुम्हारे पास आऊंगा। बेटी पलक तुम अपने भाइयों का ध्यान रखना। बेटा अंशुल और लालू मेहनत से पढ़ाई करना। अच्छे विद्यालय में प्रवेश लेना और अच्छी सी नौकरी करना। तुम्हारी मम्मी हृदेश बहुत अच्छी है, उसे कभी परेशान मत करना और उसका कहना मानना।
एरियर और मानदेय की रकम आने पर उधारी वाले लोगों को कुछ पैसा दे देना। सुसाइड नोट में लिखी बातों को पढ़कर हर मन स्तब्ध है। शिक्षामित्र के मन की बातों ने सबको हिलाकर रख दिया है। परिवार में बच्चों को मां का ख्याल रखने की सीख दी है, तो सरकारों की वजह से आर्थिक तंगी झेलने की टीस साफ झलक रही है।
सुसाइड नोट को पढ़कर साफ है कि शिक्षामित्र कहीं ना कहीं आर्थिक रूप से खुद को कमजोर महसूस कर रहा था। इसके चलते उसने आत्मघाती कदम उठाया। परिवार में कोहराम है और मनमोहन के बच्चे अपने भविष्य को लेकर चिंतित है। बार-बार रोते है और पिता को याद कर सरकारों को कोसते है। घर आने वाले लोग भी सरकार और सियासत से सवाल कर रहे है, लेकिन मनमोहन के परिवार का दुख कम करने के लिए अब तक किसी ने सुध नहीं ली है।