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...अब तो ऊंची कर लो जेल की दीवारें

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आगरा। मथुरा की जिला जेल से तीन कैदियों के दीवार कूदकर फरार हो जाने से आगरा की भी दोनों जेलों के अधिकारियों को कुछ टेंशन हो गई है। कारण यह है कि यहां जिला और सेंट्रल जेल की दीवारों की ऊंचाई मानक से कम है। इन्हें ऊंचा किए जाने के लिए शासन से मंजूरी मिल चुकी है लेकिन कुछ अड़चनों के चलते काम नहीं हो पा रहा है।
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जेलों की ऊंचाई का मानक कम से कम 6.6 मीटर ( 22 फुट ) है। वर्ष 2009 में सभी जेलों का सर्वे कराया गया था। तब यह बात सामने आई कि सेंट्रल जेल की ऊंचाई इससे चार फुट कम है। यह चिंताजनक स्थिति है। यह जेल 1983 में बनी है। इसकी दीवार पुरानी है। इसे ही ऊंचा किए जाने का प्रयास किया जा चुका है लेकिन यह इतना भार नहीं उठा पा रही।

इस पर तय किया गया कि 22 फुट की एक और दीवार बना दी जाए। इसमें जमीन का विवाद आड़े आ रहा है। जेल के पास की जमीन पर कुछ लोगों ने दावा कर रखा है। जिला जेल की भी यही कहानी है। हालांकि यहां दीवार को ऊंचा किए जाने का काम शुरू हो चुका है। अभी 300 मीटर का हिस्सा बचा हुआ है।
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सेंट्रल जेल से भाग चुका है कैदी

सेंट्रल जेल से नवंबर 2013 में जितेन्द्र उर्फ चीकू भाग गया था। यह अभी तक पकड़ा नहीं जा सका है। उस पर ईनाम भी घोषित किया गया लेकिन कुछ पता नहीं चल पाया। इसके अलावा पुलिस अभिरक्षा से पिछले दो साल में 11 कैदी भाग चुके हैं। इनमें से एक तो हाल ही में एसएन मेडिकल कॉलेज से भागा था।

मथुरा की घटना पर रेंज में अलर्ट

मथुरा जेल से तीन कैदियों के फरार हो जाने की घटना पर पूरी रेंज में सभी जेलों में अलर्ट किया गया है। इसके लिए डीआईजी जेल संजीव त्रिपाठी की ओर से निर्देश दिए गए हैं । उन्होंने कहा है कि कोहरे में रोशनी का इंतजाम किया जाए।

जेल का सभी हिस्सों में रोशनी होनी चाहिए। मथुरा की घटना की एक वजह कोहरा भी माना जा रहा है। फरार होने वाले कैदियों को इसका लाभ मिला। ड्यूटी में चौकसी बरतने के लिए कहा गया है। अधिकारियों को भी अलर्ट किया गया है।
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